वन्यजीवों की खाद्य श्रृंखला के आंकलन के लिए ट्रांजिट सर्वे शुरू
बाघ गणना के पहले चरण की प्रक्रिया मैलानी में जारी
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क के बाद किशनपुर सेंचुरी में ट्रांजिट लाइन सर्वे शुरू हो गया है। बाघ गणना की शुरुआती प्रक्रिया के तहत शाकाहारी और मांसाहारी जीवों की गणना और जंगल की वनस्पतियों के घनत्व का आंकलन करने के लिए ट्रांजिट लाइन सर्वे किया जा रहा है। इसके लिए 21 वनकर्मियों और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को लगाया गया है। किशनपुर सेंचुरी के मैलानी रेंज में ट्रांजिट लाइन सर्वे की प्रक्रिया दो दिन पहले शुरू हुई है।
हर चार साल में होने वाली बाघ गणना के तहत पहले और दूसरे चरण में जंगल में ट्रांजिट लाइन सर्वे होता है। इसमें 2000 मीटर की लाइन बनाकर वनकर्मी वहां तक जाते हैं और इस लाइन में मिलने वाले वन्यजीवों के मल का नमूना लेकर उसकी वैज्ञानिक जांच कराकर यह पता लगाया जाता है कि क्षेत्र में किस वन्यजीव की कितनी संख्या है और उस क्षेत्र में किन-किन प्रजातियों के वन्यजीव उपलब्ध है। इन वन्यजीवों की आबादी का घनत्व का भी ट्रांजिट लाइन सर्वे से आंकलन होगा।
सर्वे के जरिए वनस्पतियों की प्रजातियां, प्रकार और उनके घनत्व का पता लगाया जाता है। हर चार साल बाद होने वाले सर्वे में वनस्पतियों के अध्ययन से यह भी पता लगाया जाता है कि जंगल के वानस्पतिक ढांचे में क्या बदलाव हो रहा है। कौन सी वनस्पतियां लुप्त हो रही हैं और कौन सी वनस्पतियां उस इलाके में अपना स्थान ले रही हैं। बाद में इस बदलाव के कारणों के बारे में उच्च स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन होता है।
नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथार्टी की निगरानी में होने वाली बाघ गणना के पहले आल इंडिया टाइगर इस्टीमेशन के तहत पहले और दूसरे चरण में ट्रांजिट लाइन सर्वे और तीसरे चरण में कैमरा ट्रैपिंग और चौथे चरण में कैमरा में ट्रैप हुई तस्वीरों का विश्लेषण किया जाता है। विश्लेषण के जरिए क्षेत्रवार बाघों की संख्या का पता चलता है। क्षेत्रवार बाघों की गणना पूरी होने के बाद ही राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़े कंपाइल कर रिपोर्ट जारी होती है।
मैलानी रेंज के तीन सेक्सन चलतुआ, भीरा और जटपुरा में ट्रांजिट लाइन सर्वे चल रहा है। पहले चरण में चलतुआ की बीट संख्या 37, 38, भीरा की बीट संख्या 33, 34, 35, जटपुरा की बीट संख्या 36 और 39 को चुना गया है। इसमें कुल 21 वनकर्मी लगाए गए हैं। रेंजर नसीम अहमद के निर्देशन में होने वाले इस ट्रांजिट लाइन सर्वे में गणेश शंकर शुक्ला, सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अवतार सिंह और कठारिया आदि शामिल हैं।
ट्रांजिट लाइन सर्वे से फूड चेन का होता है आंकलन
दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक महावीर कौजलगि का कहना है कि ट्रांजिट लाइन सर्वे के जरिए इस बात का भी आंकलन किया जाता है कि जंगल की खाद्य श्रृंखला कितनी समृद्ध है। शाकाहारी जीवों केे लिए घास और दूसरी वनस्पतियां कितनी मात्रा में उपलब्ध हैं। जहां शाकाहारी जीवों के लिए पर्याप्त वनस्पतियां होंगी वहां शाकाहारी जीवों की संख्या भी ज्यादा होगी। शाकाहारी जीव ज्यादा होंगे तो बाघों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध होगा। ऐसे जंगल में बाघों की संख्या भी बढ़ेगी।