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बालू खनन से नाराज ग्रामीणों ने हाइवे पर जाम लगाकर किया प्रर्दशन

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बालू खनन से नाराज ग्रामीणों ने हाइवे पर लगाया जाम, प्रर्दशन
ठेकेदार के समर्थकों से भिड़े ग्रामीण, बंद कराया काम
प्रभारी निरीक्षक के आश्वासन पर ग्रामीण हुए शांत
तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने की जांच, मानक के विपरीत मिली खुदाई
26एलकेएच451 से 453 तक
अमर उजाला ब्यूरो
सिंगाही। जौरहा नदी में आबादी की ओर ऊंचे स्थान पर बालू निकालने से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा शनिवार को फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों ने निघासन-बेलरायां स्टेट हाइवे पर खैरीगढ़ तिराहे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। प्रभारी निरीक्षक अजय प्रकाश मिश्र ने पैमाइश न होने तक बालू न निकालने देने का आश्वासन दिया तब जाकर लोग शांत हुए। इस दौरान ठेकेदार के समर्थकों और ग्रामीणों में तीखी नोकझोंक भी हुई। तहसीलदार पूरन सिंह राना और नायब तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह ने मौके की जांच की। जांच में मानक के विपरीत बालू की खुदाई मिली। तहसीलदार ने मानक के अनुसार खुदाई करने की हिदायत देते हुए काम बंद कराते हुए ग्रामीणों की मांग पर तकनीकी जांच कराने की बात कही है।
क्षेत्र के मांझा, चौगुर्जी, भैरमपुर आदि गांवों के लोग जौराहा नदी पर बने अस्थाई पुल से होते हुए सिंगाही आते हैं। पड़ोस के कई घरों को नदी कटान कर अपने आगोश में ले चुकी है। नदी अब मांझा गांव की ओर से अपना रुख बदलकर दक्षिण की ओर बढ़ गई है। शासन से करीब 10 लाख रुपये का बालू निकालने का ठेेका पलिया के एक ठेकेदार ने लिया है। मांझा प्रधान संतोष सिंह, प्रधान वीरेंद्र सिंह, कुलवंत सिंह, मंजीत सिंह, सतनाम सिंह, त्रिलोक सिंह, जगीर सिंह आदि ने बताया कि करीब पांच साल पहले उनकी कृषि योग्य भूमि कटान के चलते नदी में समा गई थी। दो साल पहले नदी का रुख दक्षिण की ओर हो गया। वहां पर नदी ने बालू आदि से पटान कर दिया था। आरोप है कि ठेकेदार अपनी मनमानी करते हुए नदी के बीच की बालू निकालने के बजाए ऊंचे स्थान की बालू छह जेसीबी मशीनों से से निकाल रहा है। आरोप है कि ठेकेदार ने करीब बीस फुट की गहराई से बालू निकाल रहा है। यदि इतनी गहराई से बालू निकलती रही तो उनकी बची भूमि और आशियाने कटान की कगार पर पहुंच जाएंगे। नाराज किसानों ने बैठक कर बालू निकालने का विरोध किया तो ठेकेदार के समर्थक उनसे भिड़ गए। नाराज ग्रामीणों ने कार्य बंद करा दिया। ग्रामीणों का आक्रामक रूप देखकर जेसीबी के चालक और ठेकेदार के समर्थक भाग गए। ग्रामीण लामबंद होकर सिंगाही स्थित गुरुद्वारे में पहुंचे। वहां पर एकत्र होकर खैरीगढ़ रोड पर बैठकर प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दी।
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-बाक्स-
ग्रामीणों ने एसडीएम से लेकर खनन विभाग तक लगाई थी गुहार
ऊंचे स्थान से बालू निकालने को लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम और खनन विभाग को लिखित में शिकायती पत्र दिया था। आरोप है कि इसके बाद भी वहां पर कोई अधिकारी तो दूर लेखपाल भी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे नाराज ग्रामीण प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए।
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नाले ने लिया नदी का रूप
जहां इस समय नदी बह रही है। वहां पर कभी नाला हुआ करता था। कई स्थानों पर नदी ने कटान करते हुए अपना रुख बदला और पहले वाले स्थान को ऊंचे टीले के रूप में बदल दिया। ग्रामीणों ने बताया कि बालू की सील्ट नदी की धार से निकाली जाएगी तभी बाढ़ और कटान से निजात मिलेगी।
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वर्जन
बालू का ठेका शासन से हुआ है। उसमें बदलाव कराने के लिए ग्रामीण आए थे। उसमें बदलाव कर पाना संभव नहीं है। तीन मीटर तक बालू की खुदाई का मानक है। मामले में तकनीकी जांच कराई जाएगी।
अखिलेश यादव, एसडीएम
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