धौरहरा। घाघरा नदी में लकड़ी बीनने मंगलवार को नदी में गईं दो बच्चियां और दो महिलाएं अचानक पानी बढ़ने से डूब गईं थीं। उसी दिन ग्रामीणों ने डूबी एक महिला का शव बरामद कर लिया था, जबकि उसकी 12 वर्षीय पोती का दूसरे दिन भी कोई पता नहीं चला है। इसके साथ ही घटना के दिन ही एक महिला और उसकी बेटी को बेहोशी की हालत में नदी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। दोनों की हालत अब खतरे से बाहर है।
कोतवाली क्षेत्र का गांव माथुरपुर मजरा सुजानपुर घाघरा नदी के किनारे बसा हुआ है। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे गांव की रामकली (50) पत्नी अमरिका अपनी पोती करीमा (12) और पड़ोसी जगदेई (42) पत्नी जगदीश, उसकी पुत्री सीमा नदी के पानी में बहकर आई लकड़ी बीनने गईं थीं। गिरजा बैराज से अचानक पानी छोड़े जाने से करीब दो बजे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे सभी संभल नहीं पाईं और तेज धार में बह गईं। महिलाओं के शोर शराबा करने पर लोग मौके पर पहुंच गए और तलाश शुरू कर दी। कुछ देर बाद जब पानी कम हुआ तो ग्रामीणों ने जगदेई और उसकी बेटी सीमा को बेहोशी की हालत में सुरक्षित निकाल लिया। कुछ दूरी पर रामकली का शव बरामद कर लिया, लेकिन मृतका रामकली की पोती करीमा का कोई पता अभी तक नहीं चल सका है। ग्रामीणों ने बुधवार को भी उसकी खोजबीन की, लेकिन कोई पता नहीं चला। घर वालों ने पुलिस को घटना की सूचना नहीं दी है और शव का अंतिम संस्कार कर दिया है।
घटना के दूसरे दिन बाद भी बदहवाश हैं मां-बेटी
ग्रामीणों के द्वारा बेसुध हालत में घाघरा नदी से निकाली गईं जगदेई और उसकी बेटी सीमा बदहवाश हालत में हैं। दोनों घटना को याद कर सिहर उठती हैं। सीमा बताती है कि वह सभी के साथ पानी में लकड़ी बीन रही थी। जब पानी की धार तेज हुई तो वह चिल्लाई और कहा कि भागो पानी बढ़ रहा है, लेकिन जब तक वह लोग कुछ संभल पाते तब तक नदी की धार बहाने लगी। उसे आशंका है कि करीमा दलदल में धंस गई है।