निघासन। ब्लॉक क्षेत्र के कौड़िया गांव में गोशाला से 200 मीटर की दूरी पर स्थित सूखे नाले में एक साथ 17 मृत गोवंश के पड़े होने का मंगलवार को वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई। बुधवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आक्रोश जताते हुए हंगामा किया। प्रशासनिक टीम ने सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया है, जिसमें अलग-अलग तारीखों में मौत की पुष्टि हुई। ये गोवंश गोशाला के हैं या नहीं, इसकी जांच जारी है।
निघासन ब्लॉक की धर्मापुर ग्राम पंचायत के कौड़िया गांव में दो साल पहले गोशाला बनी है। इसके पड़ोस में करीब 200 मीटर की दूरी पर चरागाह की बंजर पड़ी जमीन के पास एक नाला है। मंगलवार की शाम को किसी ने नाले में मृत पड़े गोवंशीय पशुओं का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वायरल करने वाले ने इन पशुओं को गोशाला का बताया। जानकारी पाकर बुधवार को बजरंग दल और गोरक्षा दल से जुड़े रामसहाय निषाद, सुनील श्रीवास्तव, प्रदीप शर्मा, मुकेश निषाद, राकेश निषाद और मनोज निषाद आदि पदाधिकारी कौड़िया गांव पहुंचे और वहां हंगामा करते हुए नारेबाजी की।
इसी बीच मौके पर पहुंचे बीडीओ जयेश कुमार सिंह, मझगईं एसओ अवधराज सिंह और पलिया कोतवाल विवेक उपाध्याय आदि प्रदर्शनकारियों को समझाते रहे लेकिन पदाधिकारी एफआईआर और कठोर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। उधर पुलिस ने ग्राम सचिव की तहरीर पर पुलिस ने एक अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
ग्रामीण बोले- अक्सर डाले जाते हैं शव
निघासन। मंगलवार देर शाम वीडियो वायरल होने के बाद नाला पाटने की कोशिश की गई। ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार देर रात ट्रैक्टर से करहा चलाकर नाले में पड़े गोवंशीय पशुओं के शव को मिट्टी में दबाने की कोशिश की गई। वहीं, गोशाला से दूर मौजूद चरागाह की बंजर जमीन की भी जोताई कर दी गई। इसके बावजूद नाले से गोवंशीय पशुओं के शव दिखते रहे। ग्रामीणों ने बताया कि नाले में अक्सर सात-आठ गोवंशीय पशुओं के शव लाकर डाल दिए जाते हैं। इनकी वजह से यहां गिद्धों का डेरा बना रहता है। किसानों को दुर्गंध की वजह से आना मुश्किल हो जाता है।
गोशाला में अव्यवस्था के चलते बीमार हो रहे गोवंश
निघासन। ग्रामीणों का कहना है कि गोशाला में भरपेट चारा, पानी और ठंड में बैठने के लिए पत्ती या पुआल न होने से गायें दम तोड़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वीडियो वायरल होने के बाद गोशाला में नया तिरपाल लाकर टांग दिया गया। जानवरों के नीचे गन्ने की सूखी पत्ती डाल दी गई और एक ट्राली हरा चारा लाकर खड़ा कर दिया गया। गायों के शरीर में हड्डियों के अलावा कुछ नहीं बचा है।
सरकारी रिकॉर्ड में महज दस गोवंश मरे
निघासन। गोशाला के रिकॉर्ड के मुताबिक, गोशाला में 317 गोवंश थे, जिनमें से दस की मौत हो गई। जबकि, 22 गोवंश ग्रामीणों के सुपुर्दगी में दिए गए थे। ऐसे में गोशाला में सिर्फ 285 गोवंश बचे हैं। उधर, ग्रामीणों का आरोप है कि बुधवार को यहां इतनी गायें नहीं थीं। गायों की मौत सामने आने के बाद बुधवार सुबह छुट्टा गोवंश को गोशाला में भर दिया गया। जल्दबाजी में कुछ टैगिंग भी नहीं की गई।
कुछ अज्ञात लोग डाल गए शव : जांच रिपोर्ट
लखीमपुर खीरी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सोमदेव चौहान व सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि निघासन की ग्राम पंचायत धर्मापुर की आबादी से करीब 2.50 किमी दूरी पर खंती में मृत गोवंश मिलने के बाद जांच टीम बनाई गई थी। टीम में लेखपाल लावण्य गंगवार, ग्राम पंचायत सचिव राजेश कुमार व ग्राम प्रधान राज कुमार, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी निघासन डाॅ. इंद्रदेव माहर एवं पशु चिकित्साधिकारी सिंगाही डाॅ. अवधेश कुमार ने मौका मुआयना किया। जांच टीम के निरीक्षण में गोशाला में 315 गोवंश मौजूद मिले। तीन बीमार थे। गोशाला में व्यवस्थाएं मुकम्मल पाई गईं। चारे चारे के अलावा 25 क्विंटल भूसा उपलब्ध पाया गया। ठंड से बचाव के इंतजाम भी हैं। उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर 17 गोवंश मृत मिले थे। जिनका मंगलवार की शाम को पोस्टमार्टम कराया गया है। रिपोर्ट में सभी पशुओं के अलग अलग दिन दम तोड़ने की पुष्टि हुई है। जारी प्रेसनोट में सीवीओ और सीडीओ ने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों मृत गोवंशों को मौके पर डाल गए। अज्ञात के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मझगई थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।