ममरी। वन रेंज मोहम्मदी महेशपुर की देवीपुर बीट क्षेत्र में घमहाघाट, नरसिंहपुर, मुल्लापुर गांव की आबादी के समीप 15 दिनों से दहशत का पर्याय बने बाघ की लोकेशन ट्रेस करने, उसे जंगल में खदेड़ने के लिए गन्ने के खेतों में कांबिंग का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा, वन कर्मियों को कई जगह बाघ के ताजे पगचिन्ह मिले।
देवीपुर बीट जंगल से 400 मीटर दूर बसे सरदार मक्खन सिंह के झाले के समीप एक गाय और एक चीतल, नरसिंहपुर गांव के पास एक बैल, एक बछड़े को शिकार बनाने वाले बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए वन कर्मियों, एसपीएफ जवानों ने घमहाघाट के इर्द-गिर्द गंगाकली हथिनी को गन्ने के खेतों में घुसाकर कांबिंग की। रेंजर बनारसीदास शाक्य ने बताया कि गन्ना बाहुल्य क्षेत्र होने से बाघ का तो पता नहीं चला लेकिन कठिना नदी के समीप जुते खेतों में उसके ताजे पग चिन्ह बने मिले हैं, इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ कहीं गन्ने में ही छुपा है।
रेंजर ने बताया कि बाघ अपना रुख गांव की आबादी की तरफ न करने पाए के उद्देश्य से बाघ प्रभावित क्षेत्र में गंगाकली हथिनी संग सुबह शाम कांबिंग कराई जा रही है। साथ ही गांव में मुनादी कराके सड़कों के किनारे पोस्टर लगाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ी तो पिंजड़ा भी लगाया जाएगा।