अभिभावकों को राहत देने वाले शुल्क निर्धारण के प्रस्तावित अध्यादेश के खिलाफ कान्वेंट स्कूलों की एकजुटता फेल हो गई। अधिकांश विद्यालयों ने स्कूल बंद न करने का निर्णय लिया। शनिवार को महज सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त कुछ विद्यालय ही बंद रहे। ज्यादातर विद्यालयों में शिक्षण कार्य हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निजी स्कूलों द्वारा ली जा रही मनमानी फीस पर अंकुश लगाने के लिए अध्यादेश प्रस्तावित किया है। इसी क्रम में बीएसए और डीआईओएस ने भी स्कूलों को गाइड लाइन जारी कर दी है। इससे घबराए कान्वेंट स्कूलों के प्रबंधकों ने शुक्रवार को इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन के जिलाध्यक्ष गुरुकृपाल सिंह के नेतृत्व में बैठक कर शनिवार को बंदी की घोषणा की थी। इसके तुरंत बाद स्कूलों की ओर से अभिभावकों के मोबाइल पर शनिवार को स्कूल बंद रहने का मैसेज भेज दिया गया, लेकिन कारणों के बारे में नहीं बताया गया। शनिवार की सुबह ही सीबीएसई/आईसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त कान्वेंट स्कूलों के मेन गेट पर शिक्षा बचाओ अभियान लिखे बैनर टांग दिए गए, जिसमें शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान के लिए रामलीला मैदान नई दिल्ली का जिक्र किया गया है। कुछ स्कूलों के प्रबंधक प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली भी गए। वहीं यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त कान्वेंट स्कूल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज समेत ज्यादातर प्राइवेट स्कूल खुले रहे।
बच्चों और अभिभावकों का नुकसान
शुल्क निर्धारण के प्रस्तावित अध्यादेश में अभिभावकों को राहत देने वाले निर्णय शामिल हैं, लेकिन इसका फायदा नहीं मिला बल्कि कान्वेंट स्कूलों की बंदी से नुकसान उठाना पड़ रहा है। मसलन बच्चों को पढ़ाई से वंचित होना पड़ा, तो स्कूलों ने वाहनों का डीजल खर्च भी बचा लिया। इसकी वजह है कि कान्वेंट स्कूल वाहन शुल्क पहले ही वसूल लेते हैं। इसमें पूरे 12 महीने का वाहन शुल्क शामिल होता है। यहां तक कि ग्रीष्म और शीतकालीन अवकाश का भी वाहन शुल्क जमा करा लिया जाता है।
यह स्कूल बंद रहे
अजमानी इंटरनेशनल स्कूल, अजमानी पब्लिक स्कूल, ग्रीन फील्ड एकेडमी, लखनऊ पब्लिक स्कूल, ग्लोबल कान्वेंट, डान बास्को, स्कालर वर्ल्ड, लॉ माटीना, चिल्ड्रेंस एकेडमी, बीपीएस, संत रंजीत सिंह एकेडमी दाउदपुर आदि स्कूल शनिवार को बंद रहे।