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सखी होइगा मोबाइल बवाल लगाए हल्लो हल्लो....

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सखी होइगा मोबाइल बवाल लगाए हल्लो-हल्लो..
- सिद्धदात्री मंदिर पर हुआ कवि सम्मेलन, रात भर जमे रहे श्रोता
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
नवसंवत्सर के उपलक्ष्य में शहर के मोहल्ला सिकटिहा कॉलोनी स्वरूपनगर स्थित मां सिद्धिदात्री नवदुर्गा मंदिर में एक कवि सम्मेलन हुआ। कवि सम्मेलन का संयोजन मयंक मोहन दीक्षित और केवलराम शुक्ल ने किया। राज किशोर पांडे प्रहरी की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन में पूरी रात श्रोता जमे रहे। भोर की पहली किरण तक चले इस कवि सम्मेलन में स्थानीय कवियों के अलावा बाहरी कवियों ने भी अपनी रचनाएं सुनाकर लोगों को राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत किया। कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि मोहन बाजपेयी ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
बाराबंकी से आए कवि डॉ. सर्वेश के संचालन में कवि गोष्ठी की शुरुआत अवधी के कवि विशेष शर्मा ने वाणी वंदना से की। इसके बाद कुलदीप समर ने पढ़ा ‘हमें इतिहास लिखना है, तुम्हें इतिहास पढ़ना है’ तो श्रोताओं ने जोरदार समर्थन किया।
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ओज के कवि अतुल मिश्र मधुकर ने ‘हमारा प्यारा भारत देश’ रचना पढ़ी तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गजलकार अमित कैथवार की कविता ‘पादरी और मौलानाओं की भी जांच करो’ लोगों ने खूब सराही। वहीं हास्य कवि इंद्रपाल वर्मा की रचना मोबाइल ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
आशुतोष जय के ओजस्वी मुक्तक ज्ञानेंद्र वत्सल की शृंगार रचनाएं शाश्वत अभिषेक की रचना ‘बोलो वंदे मातरम्’ पर श्रोता देर तक झूमते रहे। स्थानीय कवि विकास सहाय ने गीत पढ़ा ‘तेरे हाथों में लाल लाल मेहंदी रचाऊंगा’ तो पूरा पंडाल झूम उठा। विशेष शर्मा ने डिग्री कविता सुनाकर लोगों को हंसा हंसाकर लोटपोट किया तो शशांक पांडेय की राम जन्मभूमि पर कविता भी लोगों ने सराही। सुनीत बाजपेयी ने ओजस्वी पंक्तियों से लोगों का आह्वान किया। सीतापुर से आए आलोक सीतापुरी ने मोबाइल रचना और होली के गीत सुनाकर लोगों को खूब हंसाया उनका गीत ‘सखी होइगा मोबाइल बवाल लगाए हल्लो हल्लो’ बहुत पसंद किया गया।
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संयोजक मयंक मोहन दीक्षित के शृृंगार के मुक्तक लोगों ने खूब सराहे। अंत में अध्यक्षता कर रहे राज किशोर पांडेय प्रहरी ने राष्ट्र विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि संस्कृति के सनातन दुर्ग को ढहने नहीं देंगे, विदेशी धर्म रोधी धार को बहने नहीं देंगे। मेजर श्रीपाल शुक्ल ने कवियों का स्वागत किया। केवलराम शुक्ल ने आभार जताकर कवियों की विदाई की।
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