लखीमपुर खीरी। प्रत्येक माह के तीसरे बुधवार को मनाए जाने वाले किसान दिवस के मौके पर कलेक्ट्रेट सप्ताह में किसानों को बुलाया गया। इन दिनों पीएम मोदी के कहने पर सब भूजल संरक्षण की बातें कर रहे हैं तो इस कार्यक्रम भूजल सप्ताह गोष्ठी का रूप दे दिया गया। इसमें जब डीएम बैठे तो इन किसानों को तो बस सुनना ही था, कहा तो उन्होंने बाद में बाहर आकर, आपस में। एक दूसरे से कहने लगे ये अफसर क्या जानें किसानों की असली परेशानी, बस कागजी काम करते रहते हैं। इन्हीं बातों को सुनकर जब अमर उजाला रिपोर्टर ने उनसे बात की तो उनका दर्द सामने आ गया।
किसानों का कहना था कि सिर्फ कागजों पर दिवस आयोजित करने से किसान खुशहाल नहीं होंगा। कागजों पर तो सब ठीक ठाक चल रहा है, लेकिन हकीकत में किसानों की समस्याएं क्या हैं न तो उन्हें कोई जानना चाहता है और न ही दूर करना ही। किसानों का कहना है कि सच्चाई यह है कि समितियों से न तो खाद मिल पा रही है और न ही कीटनाशक ही। खाद मिलती भी है तो वह निर्धारित मूल्य से अधिक पर। आगे कहा कि अफसर आय दोगुनी करने की बात करते हैं, मगर ऐसे कैसे हो पाएगी। गोष्ठी में 25-30 किसान थे और इतने ही अधिकारी और कर्मचारी भी।
सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए किसान दिवस का आयोजन होता है। जबकि सरकारी दुकानों पर ही किसानों को निर्धारित मूल्य से अधिक रेट पर यूरिया बेंची जा रही है। इसका संज्ञान लेने वाला कोई नहीं है।
लियाकत अली खां
ग्राम पहाणा, बेहजम
गांव में स्थित समिति की दुकान पर खाद नहीं रहती। पड़ोस गांव की समिति पर जब लेने जाओ तो वहां पर देेने से मना कर दिया जाता है। खाद न मिलने से फसलें प्रभावित होती है।
राजेंद्र प्रसाद वर्मा
गांव बेहड़ा मुल्तान, कुंभी
समितियों पर कीटनाशक दवाएं तक नहीं मिलती है। जबकि निजी दुकानों पर इनका मूल्य इतना अधिक होता है कि खरीदना मुश्किल हो जाता है।
अतीक अहमद , बेहजम
गेंहू का सीजन हो या फिर धान का। समितियों पर खाद का हर समय संकट रहता है। वहीं कृभको यूरिया केंद्र पर भी यूरिया निर्धारित मूल्य से अधिक पर बेंची जा रही है।
कासिम खां
ग्राम अंदेशनगर, फूलबेहड़
अफसरों ने सरकार की योजनाएं गिनाईं और दी अपनाने की सलाह
किसान दिवस पर हुई भूजल सप्ताह गोष्ठी में विभिन्न विभागीय अधिकारियों ने किसानों को सरकार की योजनाओं गिनाते हुए उन्हें अपनाने की नसीहत दी। अधिकारियो ने कहा कि इस तरह किसान अपनी आय दोगुनी कर अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर सकते हैं।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डीएम ने भूजल प्रबंधन, वर्षा जल संचयन एवं भूजल रिचार्ज के बारे में किसानों को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जल के बिना जीवन संभव नहीं है, क्योंकि जल प्रकृति का महत्वपूर्ण घटक है। स्वच्छ जल मानव से लेकर पशु पक्षी एवं जीव जन्तु और वनस्पतियों के लिए आवश्यक है, जिसका संरक्षण करना हमारा दायित्व है। उप कृषि निदेशक टीएम त्रिपाठी ने कहा कि भूजल संरक्षण के लिए ही भूजल सप्ताह मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य भूजल दोहन को रोकने एवं वर्षा जल के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान खेत की मिटटी बहकर दूसरे खेत एवं नदी, नालों में चली जाती है, जिससे खेत की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। इसलिए खेत की मेड़ बंदी करते रहें, जिससे मृदा संरक्षण के साथ बारिश का पानी भी संरक्षित हो सके। इस दौरान जिला गन्ना अधिकारी, डीडीओ, सहायक अभियंता लघु सिंचाई, डीआईओएस ने किसानों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित कर संकल्प दिलाया।