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अब महरिया की गोशाला में तीन गोवंशीय पशु मरे

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ईसानगर (लखीमपुर खीरी)। धौरहरा की बबुरी नरूपुर के बाद बुधवार को 12 घंटे के अंतराल में ईसानगर के महरिया पशु आश्रय केंद्र (गोशाला) में तीन गोवंशीय पशुओं के मरने का मामला सामने आया है। बबुरी नरुपुर के पशु आश्रय केंद्र में सात गायों की मौत का ‘अमर उजाला’ में खुलासा होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा है। गुरुवार को पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची और मरणासन्न व बीमार गायों का परीक्षण कर इलाज शुरू किया। इंजेक्शन लगाए और तीन बछड़ों व दो गायों को ताकत के लिए ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई। साथ ही चारा-पानी का भी इंतजाम किया गया। वहीं एसडीएम अशीष कुमार मिश्रा ने निरीक्षण भी किया। उन्होंने हरे चारे की व्यवस्था न होने पर नाराजगी जताई और जल्द मंगाने को कहा।
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विकासखंड ईसानगर के ग्राम पंचायत महरिया में स्थित अस्थाई गो आश्रय स्थल में न तो गायों के खाने के लिए समुचित चारा है और न ही पीने के पानी के लिए बोरिंग हुई है, जबकि आश्रय स्थल में 300 से अधिक गोवंशीय पशु रखे गए हैं। लोगों का कहना है कि बीमार पशु इलाज और चारे के अभाव में मर रहे हैं। बुधवार को 12 घंटे के अंतराल में यहां दो गायों और एक बछड़े की मौत हो गई। इस बाबत मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. तिवारी का कहना है कि 20 दिन पहले यहां बीमार हुईं दो गायें अलग-अलग दिन मर गईं थीं, जबकि बुधवार की शाम को एक व्यक्ति ब्लेड वायर से मृत लहूलुहान बछड़ा लेकर आया और गोशाला में फेंक गया। यह व्यक्ति जब बछड़ा फेंक रहा था, उस समय एसडीएम धौरहरा निरीक्षण करने पहुंचे थे, लेकिन जब तक वह समझ पाते वह व्यक्ति भाग गया। वहीं एसडीएम धौरहरा आशीष कुमार मिश्र ने बताया कि डीएम के निर्देश पर वह महरिया की गोशाला का निरीक्षण करने गए थे। उनके सामने एक व्यक्ति लहूलुहान मृत बछड़ा फेंक कर भाग निकला। फिलहाल क्षेत्र में गोवंश के हित में फसलों को बचाने के लिए लगाए जा रहे ब्लेड युक्त तार पर रोक लगाई जाएगी।

धौरहरा के बबुरी नरुपुर की गोशाला में पशुओं का समुचित इलाज किया जा रहा है। पशुओं को गोशाला की भूमि पर ही दफनाया गया है। गोवंश के शवों के साथ कोई बेअदबी नहीं की गई है। यहां के गोवंश के इलाज के लिए टीम लगा दी गई है। साथ ही पूरे मामले में पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश गुप्ता का अभी स्पष्टीकरण नहीं मिला है। स्पष्टीकरण के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. टीके तिवारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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बबुरी नरुपुर गो आश्रय केंद्र में मरणासन्न और बीमार गोवंशीय पशुओं का इलाज शुरू हो गया है। मृत सात गायों के पोस्टमार्टम की जरूरत इसलिए नहीं समझी गई, क्योंकि इन गोवंशीय पशुओं की स्वाभाविक मौत हुई है। साथ ही पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें यह भी स्पष्ट किया जाएगा। इसके बाद भी किसी स्तर पर लापरवाही मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी। -शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम।

गोवंश की मौत पर डीएम भी हुए सख्त, कहा-अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी
लखीमपुर खीरी। धौरहरा की गोशाला में गोवंशीय पशुओं की मौत पर डीएम सख्त हो गए हैं। बुधवार की शाम को उन्होंने सीडीओ रवि रंजन के साथ विकास भवन सभागार में जिले में संचालित गौवंश आश्रय स्थलों के निर्माण एवं संचालन की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान डीएम ने सीवीओ डॉ. टीके तिवारी के अलावा सभी पशु चिकित्सकों, बीडीओ और एडीओ से दो टूक कहा कि गो आश्रय स्थल में प्रति एक सौ गाय पर 10 कर्मचारी रखे जाएं। पशुओं की संख्या ज्यादा हो तो दूसरी जगह भेज दें, लेकिन कोई शिथिलता क्षम्य नहीं होगी। साथ ही डीएम ने कहा कि लोगों की गोशाला के प्रति रुचि बढ़े, इसके लिए सभी अधिकारी एक-एक हजार रुपये जमा करें। यह पैसा एडीएम और सीवीओ के संयुक्त खाते में जमा किए जाएंगे और गो आश्रय स्थलों पर स्टाफ की तैनाती से लेकर चारे आदि भी खर्च किए जाएंगे। डीएम ने धौरहरा के पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश गुप्ता का स्पष्टीकरण लेकर जल्द संपूर्ण रिपोर्ट देने के निर्देश सीवीओ को दिए।

कटीले तारों से घायल पशुओं को फेंक जा रहे लोग
सीवीओ डॉ. टीके तिवारी ने बताया कि गोशालाओं में लोग घायल पशुओं को फेंक जा रहे हैं। यह पशु वह होते हैं, जो फसलों के बचाने के लिए लोगों द्वारा लगवाए गए कंटीले तार (धारदार ब्लेडयुक्त) में फंसकर घायल हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे घायल पशुओं का उपचार किया जा रहा है, लेकिन इस पर रोक लगनी चाहिए अन्यथा पशु घायल होकर मरते रहेंगे।

सभी एसडीएम ने देखीं गोशालाएं
बुधवार को जिले भर की गोशालाओं का क्षेत्र के संबंधित एसडीएम ने निरीक्षण किया। हालांकि कहीं से भी यह रिपोर्ट नहीं भेजी गई कि अव्यवस्था है। चारे की व्यवस्था और स्टाफ बढ़ाने की डिमांड की गई है, जिस पर डीएम ने संबंधित को निर्देश दिए हैं।

डीएम साहब, गोशालाएं खुल गईं तो यह सड़कों पर क्यों हैं गोवंश
लखीमपुर खीरी। जिले में ग्रामीण इलाकों में 22 और नगरों में छह गो आश्रय स्थल खुल चुके हैं, इसके बाद भी सड़कों पर गोवंशीय पशु घूम रहे हैं। शहर से बाजारों से लेकर ओवरब्रिज, चौराहों और पीलीभीत-बस्ती हाइवे तक पर गोवंशीय पशुओं का डेरा लोगों को परेशान करता है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। इन पशुओं से जहां लोगबाग चोटिल होते हैं, वहीं यह पशु भी वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। जिले में जब लगातार गोशालाएं खुल रहीं हैं तो डीएम को चाहिए कि इन पशुओं को भी उनमें पहुंचवाएं ताकि शहर और नगरों की यातायात व्यवस्था न प्रभावित हो।
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