लखीमपुर खीरी। घर घर टीबी रोगी खोजी अभियान दस जून से शुरू हुआ। इन सात दिनों में गठित टीमों ने 88 रोगियों को खोज निकाला। अभियान के दौरान सबसे ज्यादा 14 रोगी गोला में मिले।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि टीबी रोगी खोजी अभियान दस जून से 20 जून तक चलना है। रोगियों को खोजने में 230 टीमें लगाई गई थी। जिन्होंने लक्षण के आधार पर 268964 लोगों से बातचीत कर 2177 संदिग्ध लोगों के सैंपल लेकर जांच कराई, जिसमें से 88 लोग टीबी रोग से ग्रसित मिले। इसमें गोला में मिले सर्वाधिक 14 टीबी रोगी, बिजुआ में चार, बरबर में दो, निघासन में पांच, मितौली में पांच, गोला में 14, बांकेगंज में चार, नकहा में एक, फरधान में आठ, रमियाबेहड़ में एक, कुंभी में चार, बेहजम में चार, खमरिया में दो, मोहम्मदी में सात, पसगवां में छह, धौरहरा में नौ, खीरी में एक, फूलबेहड़ में 11 मरीज मिले।
क्या है टीबी
ट्यूबरक्लोसिस यानि टीबी घातक संक्रामक रोग है। जो माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु से फैलता है। जो सीधा फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह शरीर के अन्य भागों पर भी प्रभाव डाल सकता है। टीबी रोग हवा के माध्यम से फैलता है। टीबी रोगी जब बोलता, खांसता या फिर छीकता है तो इसके जीवाणु हवा के संपर्क में आकर दूसरों को संक्रमति कर देता है। सामान्य टीबी का उपचार छह से नौ माह तक चलता है।
पिछले साल खोजे गए टीबी रोगी- 7769
पुरुषों की संख्या-5068
महिलाओं की संख्या-2701
जनवरी में मिले टीबी के रोगी-258
टीबी रोग के लक्षण
बार बार खांसी आना, लंबे समय तक खांसी बनी रहना, बुखार लंबे समय तक बना रहना, वजन कम होना, आलस्य बना रहना आदि प्रमुख लक्षण हैं।