बांकेगंज। खेती में इस्तेमाल हो रहे अंधाधुंध कीटनाशकों से बांकेगंज के निकट स्थिति नगरिया झील का पानी विषैला हो रहा है। यह स्थिति आने वाले समय में मछलियों और परिंदो के लिए घातक हो सकती है। नगरिया झील में सर्दी के मौसम में हजारों की संख्या में प्रवासी परिंदे ठंडे देशों यहां आकर प्रवास करते हैं। मछलियां और जलीय जीव उनका भोजन हैं।
खेती में कीटों के रोकथाम के लिए किसान बड़ी मात्रा में कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। यह दवाएं पौधों से होती हुई मिट्टी के अंदर तक चली जाती हैं। बारिश होने पर पानी के साथ कीटनाशक दवाओं के अंश नगरिया झील मेें पहुंच रहे हैं। इससे पानी में जहर की मात्रा बढ़ रही है। यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में यहां आने वाले प्रवासी परिंदों के लिए बड़ा खतरा होगा। पानी विषैला होने से जलीय जीव जैसे मछलियां और पानी में मिलने वाले कीड़ों की संख्या कम हो रही है। यह मछलियां और जलीय कीड़े-मकोड़े इन परिंदो का भोजन होता है। यदि यह कीट और मछलियां नहीं रहीं तो आने वाले दिनों में स्थानीय परिंदे कम होंगे। प्रवासी परिंदो का भी आना कम हो जाएगा। पर्यावरणविद डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि जलाशयों के आसपास खेतों में कीटनाशाकों के इस्तेमाल पर रोक लगाना आवश्यक हो गया है। यदि ऐसा न हुआ तो आने वाले समय में इसके घातक परिणाम होंगे।