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गर्मी ने गिरा दिया दूध उत्पादन

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लखीमपुर खीरी। तेज धूप और गर्म हवा से लोग ही नहीं पशु भी परेशान हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत दुधारू पशुओं को है। उनकी दूध देने की क्षमता प्रभावित हो रही है। मौजूदा समय में जिले में करीब 14 लाख लीटर दूध की जरूरत है, लेकिन उत्पादन सिर्फ आठ लाख लीटर हो रहा है। इससे जिले में दूध की किल्लत बढ़ने लगी है।
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मई-जून की भीषण गर्मी ने दूध उत्पादन को भी काफी कर दिया है। जिले में करीब 43700 गाय और भैंस हैं। दो माह पहले तक जिले में जहां दूूध का उत्पादन दो लाख लीटर के करीब रोजाना हो रहा था, लेकिन अप्रैल-मई में चलने वाली तेज गर्म हवा के कारण दूध का उत्पादन घटकर एक लाख लीटर रोजाना के करीब रह गया है। ऐसी स्थित में जिले में दूध की मांग बढ़ने से कीमत भी बढ़ने लगी है। पहले जहां दूध चालीस रुपये प्रति लीटर मिलता था, अब एक लीटर दूध के दाम 45 रुपये प्रति लीटर हो चुका है।

जिले में दुधारू पशुओं की संख्या- 430700
दुधारू गोवंश की संख्या- 36690
दुधारू छुट्टा गोवंश- 68210
भैंस की संख्या-325800

जिले में डेर पशुओं की संख्या दुग्ध उत्पादन एक समय (कुंतल में लगभग )
कामधेनु-4 100 18
मिनी कामधेनु-18 50 45
माइक्रो कामधेनु-22 25 30

जिले में रोजाना दूध की जरूरत- करीब 14 लाख लीटर
उत्पादन हो रहा- करीब आठ लाख लीटर

हरे चारे की कमी एवं भीषण गर्मी से घट गया दुग्ध उत्पादन
दुग्ध उत्पादन समिति सहकारी संघ लिमिटेड के प्रबंधक जीसी सिंह बताते हैं कि जिले में 147 दुग्ध समितियां है, जिनसे रोजाना पांच हजार लीटर दूध उत्पादन हो रहा है। दो माह पहले तक 15 हजार लीटर के करीब था। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी में दूध सूख जाता है और इससे भैसें ज्यादा प्रभावित होती है, क्योंकि भैंस एक तरह से पानी का पशु है। पर्याप्त पानी एवं हरा चारा न मिल पाने के कारण दूध देना कम कर देती हैं। औसतन एक भैंस रोजाना एक से सवा लीटर तक दूध कम देने लगती है।
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डेयरियों पर भी बनी दूध की कमी
अब्दुल माबूद खान दूध डेयरी के संचालक शाहाब प्रधान बताते हैं कि वर्तमान में 40 भैंस एवं पांच गाय है। इनसे दो माह पहले जहां ढाई क्विंटल दूध मिल जाता था, लेकिन गर्मी बढ़ने से अब दो कुंतल भी मिलना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि भैैंस को गर्मी ज्यादा लगती है इस कारण इनका दूध सूखने लगता है। वहीं गर्मी के कारण पशुओं को पर्याप्त हरा चारा भी नहीं मिल पाता।
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