लखीमपुर खीरी। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सपा और बसपा गठबंधन करके अपने प्रत्याशियों को लड़ाया, लेकिन निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बैठाने में नाकामयाब रहे। इसका असर चुनाव में देखने को मिला जब बसपा और सपा की रैलियों में कार्यकर्ताओं को तरजीह नहीं मिली और एक-दूसरे पर शिकायतों का ठीकरा फोड़ा।
जनपद की दो लोकसभा खीरी में सपा और धौरहरा में बसपा ने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। गठबंधन के पक्ष में दोनों सपा और बसपा के बड़े नेताओं ने जनसभा की, लेकिन कोई असर नहीं डाल सके। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बेहतर नहीं हो सका। यही वजह रही कि खीरी में गठबंधन का चुनाव चिन्ह साइकिल था, तो धौरहरा में हाथी। इससे भी कार्यकर्ता से लेकर मतदाता भ्रम में रहे। बसपा के कैडर वोट ने ईवीएम में हाथी निशान न मिलने पर दूसरे प्रत्याशियों को वोट दिया तो वहीं बसपा से गठबंधन के चलते सपा का कैडर नाराज होकर दूसरे दल खासकर भाजपा की ओर डायवर्ट हो गया।