लखीमपुर खीरी। सीतापुर मैलानी के बजाय सीतापुर लखीमपुर के बीच ब्रॉडगेज ट्रायल का काउंटडाउन शुरू हो गया है। इस रूट पर ब्रॉडगेट ट्रायल की तिथि 23 फरवरी संभावित हैं। इसको लेकर कार्यदायी संस्था युद्घस्तर पर आमान परिवर्तन का कार्य करवाने लगी है।
सीतापुर लखीमपुर के बीच बड़ी लाइन की ट्रेनें दौड़ने का ख्वाब देख रहे लोगों की हसरत जल्द ही पूरी होने वाली है। इस रूट पर अगले माह से ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा, क्योंकि रेलवे ने 23 फरवरी को सीआरएस ट्रॉयल कराने की संभावना जताई है। जिसके तहत कार्यदायी संस्था ने रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म, फुटओवर ब्रिज, रेलवे ट्रैक की पैचिंग सहित स्टेशन पर टिनशेड डलवाने का काम तेजी से शुरू करा दिया है। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों का कहना है कि सीआरएस ट्रॉयल को लेकर अभी तक लिखित में रेलवे से कोई पत्र नहीं मिला है, लेकिन 23 फरवरी की तिथि सुनने में मिल रही है। इसलिए इस तारीख को ही ट्रॉयल होना मानकर कार्य करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फरवरी के अंत तक हरहाल में ट्रॉयल होना है, जिससे मार्च में ट्रेनों का संचालन शुरू हो सके। अधिकारियों का दावा है कि मार्च से हर हालत में सीतापुर और लखीमपुर के बीच ट्रेनें दौड़ने लगेंगी।
15 अक्तूबर 2016 को बंद हुआ था संचालन
ऐशबाग से मैैलानी तक आमान परिवर्तन कार्य के लिए पहले चरण में ऐशबाग से सीतापुर के बीच 15 मई 2016 एवं दूसरे चरण में सीतापुर से मैलानी के बीच 15 अक्तूबर 2016 को मीटर गेट की ट्रेनों का संचालन बंद हुआ था। ऐशबाग से सीतापुर (86.30 किलोमीटर ) के बीच जहां नौ जनवरी 2019 से जहां ब्रॉडगेज ट्रेनें दौड़नी लगी है। वहीं मार्च में सीतापुर से मैलानी के बीच मार्च से ट्रेनें दौड़ाने की तेजी से तैयारियां चल रही हैं।
सीतापुर मैलानी के बीच दो चरणों में दौड़ेंगी ट्रेनें
करीब 106 किलोमीटर लंबे सीतापुर मैलानी रूट पर दो चरणों में ट्रेनों का संचालन शुरू होगा। पहले चरण में करीब 46 किलोमीटर लबें सीतापुर लखीमपुर ट्रैक पर बड़ी लाइन की ट्रेनें दौड़ेंगी और फिर उसके बाद करीब 61 किलोमीटर लंबे लखीमपुर मैलानी ट्रैक पर।
सिग्नल का कार्य पूरा, हुई टेस्टिंग
रेलवे स्टेशन पर पिछले काफी दिनों से चल रहा सिग्नल का कार्य बुधवार को लगभग पूरा हो गया। सिग्नल का कार्य देख रेख इंजीनियरों ने बुधवार को सिग्नल की टेस्टिंग भी की। सिग्नल की लाइटें जलते देख लोगों को जल्द ही ट्रेनों का संचालन शुरू होने की उम्मीद लगने लगी है।
कार्यदायी संस्था को जल्द से जल्द कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे फरवरी में ही सीआरएस ट्रॉयल कराने के बाद मार्च में ट्रेनों का संचालन शुरू हो सके। कार्यदायी संस्था के लोग यदि 23 फरवरी को ट्रॉयल मानकर कार्य करवा रहे हैैं तो ये अच्छी बात है। इसका मतलब संस्था 23 फरवरी तक काम पूरा कर लेगी।
- आलोक कुमार श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल