फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जंगल में मवेशी चराने पर हो रहा मानव-बाघ संघर्ष

विज्ञापन
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। तराई में मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को एक ही दिन में अलग-अलग जगहों पर बाघ हमले की दो घटनाओं में महिला समेत दो लोगों के घायल होने के बाद वनविभाग की नींद उड़ गई है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की मैलानी रेंज और दक्षिण खीरी वनप्रभाग का मोहम्मदी रेंज मानव बाघ संघर्ष के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है। जिले मेें मानव बाघ संघर्ष रोकने को वन विभाग के साथ ग्लोबल टाइगर फोरम भी काम कर रहा है। फिर भी बाघ हमले की घटनाएं रुक नहीं रहीं हैं।
विज्ञापन

दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की मैलानी रेंज में भरिगवां बीट जंगल से सटे खेत में रखवाली कर रही काकोरी मड़ैया निवासी 45 वर्षीय महिला सरोजनी देवी पर झाडिय़ों से निकले बाघ ने हमला कर दिया जिससे वह बुरी तरह घायल हो गई। जबकि दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज में रायपुर गांव निवासी 45 वर्षीय कृपाराम पर बाघ ने उस समय हमला किया जब वह देवीपुर जंगल में मवेशी चराने गया था।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों को बार बार जंगल में जाने से मना किया जाता है इसके बावजूद वे कभी ेमवेशी चराने तो कभी जलौनी लकड़ी बीनने के लिए जंगल में जाते हैं। जिससे बाघ हमले की घटनाएं हो रही हैं। वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का इन पर असर नहीं पड़ रहा है।
विज्ञापन

दुधवा टाइगर रिजर्व की मैलानी रेंज में पिछले एक साल से बाघ ने किसी इंसान पर हमला नहीं किया था। इससे स्थानीय ग्रामीण ही नहीं वनविभाग भी काफी राहत में था। गुरुवार को खेत की रखवाली कर रही महिला पर बाघ का हमला यहां लंबे अरसे बाद हुआ है। हालांकि इलाके में इस बीच बाघ और बाघिन आबादी के पास सक्रिय भी रहे। छुट्टा जानवरों को निवाला बनाया और जंगल चले गए। बाघों की दहशत के बावजूद यहां के लोगों ने जागरूकता दिखाई जिसका फायदा उन्हें मिला।
मैलानी इलाके में महिला पर बाघ हमले की खबर सुनकर घटनास्थल पर सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंच गए। बाघ हमले के बाद ग्रामीण दहशत में हैं। दहशतजदा ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे खेतों में बंदर, हिरन आदि अन्य वन्यजीव किसानों की फसलों को चर कर नुकसान पहुंचाते हैं। फसलों की रखवाली करने पर बाघों का डर बना रहता है। इससे उनकी खेती किसानी चौपट हो रही है। किसान शाम ढलने से पहले ही अपने घरों में दुबक कर बैठ जाते हैं।

बाघ हमलों से बचाव के लिए जंगल के आसपास रहने वाले लोगों के बीच लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जंगल से सटे गांव के लोगों को सतर्क रहना चाहिए। वन विभाग इंसानी जिंदगी के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। प्रभावित इलाके में वनकर्मियों की टीम लगाकर निगरानी कराई जा रही है।
विज्ञापन

डॉ अनिल कुमार पटेल,
- उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें