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चल्तुआ गांव के लोग भी बाघों का घर खाली करने पर सहमत
उप-निदेशक दुधवा ने पुनर्वास के लिए पीलीभीत के डीएम को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी के कोरजोन में बसा चल्तुआ गांव में जहां आज चहल-पहल है, खुशियों भरे गीतों की गुनगुनाहट है। वहां आने वाले दिनों में कुलाचें भरते हिरन नजर आएंगे, बाघों की दहाड़ सुनाई देगी। झोपड़ियों की जगह जंगल और झाड़ियां नजर आएंगी। इस गांव के बाशिंदे बाघों का घर खाली करने को तैयार हो गए हैं। प्रशासन की ओर से जल्द ही जंगल से बाहर पुनर्वासित किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। शायद अब वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर और बेहतर जिंदगी बिता सकेंगे।
दुधवा टाइगर रिजर्व किशनपुर सेंक्चुरी कोरजोन में बसे 15 गांवों को विस्थापित कर दूसरी जगह पुनर्वासित करने की प्रक्रिया के तहत यह दूसरा गांव है, जहां के बाशिंदे बेहतर जिंदगी के लिए दूसरी जगह पुनर्वासित होने को तैयार हो गए हैं। इससे पहले कतर्निया घाट ( बहराइच) के भरथापुर गांव में यह प्रक्रिया चल रही है। कोरजोन में बसे अन्य गांव में भी दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से मान मनौव्वल का सिलसला जारी है।
मानक के अनुसार माता-पिता के अलावा 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके बालिग संतानों को अलग परिवार माना जा रहा है, इस तरह किशनपुर सेंक्चुरी के कोरजोन में बसे चल्तुआ गांव में परिवारों की संख्या 199 है। इन सभी परिवारों को 10-10 लाख रुपया प्रति परिवार सरकार की ओर से मुआवजा की योजना है। दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक महावीर कौजलगि ने पीलीभीत जिले के डीएम को पत्र लिख कर इनका पुनर्वासन करने को कहा है। किशनपुर सेंक्चुरी का यह राजस्व गांव पीलीभीत जिले का हिस्सा है। पीलीभीत के डीएम से हरी झंडी मिलने के बाद जंगल से इनके विस्थापन और दूसरी जगह पुनर्वासन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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किशनपुर सेंक्चुरी के कोरजोन में बसे चल्तुआ गांव के लोग बेहतर जीवन के लिए जंगल से विस्थापित होने को सहमत हो गए हैं। उनके पुनर्वास के लिये दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने पीलीभीत के डीएम को पत्र लिखा है जल्द ही विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होगी। जब कि अन्य गांव कांप, महराजनगर, ग्रन्ट नं01, कांप टांडा, आदि के 250 परिवार भी परेशानी झेल रहे है। इन परिवारों से बातचीत के जरिए स्वेच्छा से पुनर्वासन के लिये तैयार किया जा रहा है।
- महावीर कौजलगि, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क