जनपद के थारू (अनुसूचित जनजाति) बाहुल्य गांवों की तस्वीर बदलने के साथ ही इनकी किस्मत का सितारा भी जल्द चमकने वाला है। पलिया और निघासन ब्लॉक क्षेत्र की 25 ग्राम पंचायतों में थारुओं की 51711 आबादी रहती है, जिनमें विकास कार्यों को युद्ध स्तर पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए शासन ने इन गांवों का सर्वे कर एक सप्ताह में रिपोर्ट (प्रस्ताव) मांगी है। गांवों को मूलभूत सुविधाओं जैसे आवास, पानी, विद्युत व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं से पूरी तरह लैस किया जाएगा, जिसके अलावा मोबाइल इंटरनेट सेवा, संपर्क मार्ग, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और वोकेशनल कोर्स ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा।
अधिकांश थारू (अनुसूचित जनजाति) बाहुल्य ग्राम पंचायतें इंडो-नेपाल बार्डर पर जंगल क्षेत्रों में हैं, जिससे इन गांवों में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पलिया क्षेत्र में सर्वाधिक 23 ग्राम पंचायतें हैं, जबकि निघासन क्षेत्र में दो ग्राम पंचायतें थारू बाहुल्य हैं। इन गांवों में कई तरह के विकास कार्यों में वन कानून आड़े आ रहे थे, लेकिन अब केंद्र सरकार के आदेश पर जनजाति विकास निदेशालय ने इन गांवों में मूलभूत सुविधाओं के साथ ही शैक्षिक, वोकेशनल ट्रेनिंग आदि सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि मोबाइल इंटरनेट सेवा से लोग आसानी से जुड़ सकेंगे। तो संपर्क मार्ग बनने से सुदूर जंगल में बसे इन गांवों तक आवागमन की राह आसान हो जाएगी। आईटीआई, पॉलिटेक्निक और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाने का निर्णय शासन स्तर से लिया जा चुका है, जिससे थारुओं को रोजगार के अवसरों की कमी नहीं रहेगी।
डीएम गठित करेंगे सर्वे टीमें
थारू बाहुल्य गांवों में जरूरी विकास कार्यों को कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा, जिसको लेकर गुरुवार को लखनऊ में प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई है। इन गांवों में स्थलीय सर्वे कर प्रस्ताव तैयार करने के लिए डीएम द्वारा टीमों का गठन किया जाएगा।
अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांवों में सर्वे कराकर विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे गए हैं। नेपाल बार्डर पर पलिया और निघासन क्षेत्र में कुल 25 ग्राम पंचायतें थारू बाहुल्य हैं, जिनकी आबादी करीब 52 हजार है। शासन की मंशा अनुरूप कार्य होने पर इन गांवों की तस्वीर बदलेगी ही और ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- यूके सिंह, परियोजना अधिकारी, एकीकृत जनजाति विकास परियोजना चंदनचौकी