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15 ब्लाकों में 38323 अतिकुपोषित बच्चे 

Mon, 13 Jun 2016 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो-लखीमपुर खीरी।
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च‌िक‌ित्‍सक
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अतिकुपोषित बच्चों के इलाज में बरती जा रही लापरवाही
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तीन माह में सिर्फ 32 बच्चों का कराया इलाज
रविवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कुपोषण की शिकार बच्ची की मौत ने कुपोषण मिटाने के लिए किए जा रहे दावों की कलई खोल दी है। अप्रैल 2016 मेें कराए गए आंगनबाड़ी सर्वे में जिले के 15 ब्लाकों में 38323 अतिकुपोषित (लाल श्रेणी) बच्चे चिह्नित किए गए थे। जबकि कुपोषित (पीली श्रेणी) बच्चों की तादाद एक लाख 28 हजार 172 तक पहुंच चुकी है। अतिकुपोषित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र पर भी बच्चों को भर्ती कराने की संख्या बहुत कम हैै। तीन माह में सिर्फ 10 ब्लाकों के 32 अतिकुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया है। जबकि पांच ब्लाकों के एक भी बच्चे को भर्ती नहीं कराया गया है।  
राज्य पोषण मिशन के तहत कुपोषित बच्चों का प्रतिमाह सर्वे कराए जाने का नियम है। इसकी जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्र में आंगनबाड़ी वर्कर और शहरी क्षेत्र में आशा वर्कर पर है। सर्वे में कुपोषित और अतिकुपोषित पाए जाने वाले बच्चों को चिह्नित किया जाता है। इसके बाद आशा और आंगनबाड़ी वर्कर को अतिकुपोषित बच्चों को समीप के सीएचसी, पीएचसी पर भर्ती कराया जाना है। यहां सुधार न होने पर जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराना होता है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण आशाएं और आंगनबाड़ी वर्कर सर्वे कार्य में रुचि नहीं ले रही हैं। इससे कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या में दिन-प्रतिदिन इजाफा होता जा रहा है।
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लंबाई के अनुसार वजन न होना कुपोषण की पहचान
पोषण पुनर्वास केंद्र के प्रभारी एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.राजेश कुमार ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार लड़कों और लड़कियों का मानक अलग-अलग निर्धारित है। दोनों में कुपोषण की पहचान लंबाई के अनुसार वजन के आधार पर की जाती है। इसके लिए आंगनबाड़ी और आशा वर्कर को इसकी ट्रेनिंग दी गई थी। कुपोषण की पहचान होने पर बच्चों को समीप के सीएचसी और पीएचसी पर भर्ती कराने की जिम्मेदारी होती है। यदि वहां पर फायदा नहीं होता है, तो ऐसे बच्चों को जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करवाया जाता है।
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तीन माह में भर्ती हुए सिर्फ 32 अतिकुपोषित बच्चे 
जिले की सभी ब्लाकों में अतिकुपोषित बच्चों की भरमार है, लेकिन अब तक पोषण पुनर्वास केंद्र पर मात्र 32 बच्चे ही भर्ती कराए गए हैं। इसमें बांकेगंज ब्लाक का एक, लखीमपुर के 10, नकहा के छह, बिजुआ का एक, पलिया के तीन, रमियाबेहड़ के तीन, कुंभी के दो, मितौली के दो, ईसानगर के तीन और मोहम्मदी के दो बच्चे शामिल हैं। जबकि पांच ब्लाक ईसानगर, धौरहरा, फूलबेहड़, बेहजम और पसगवां से अतिकुपोषित बच्चों को नहीं भर्ती कराया गया हैै।
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सभी सीडीपीओ और एमओआईसी को नोटिस जारी की जा चुकी हैै। प्रतिमाह मॉनीटरिंग की जा रही हैै। केंद्र में 10 बेड की क्षमता है, जो नोटिस देने के बाद से भरे रहते हैं। लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 
-अखिलेंद्र दुबे, जिला कार्यक्रम अधिकारी 
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