लखीमपुर खीरी। चीनी मिलों के मनमानी पर अंकुश लगाने के प्रयास सरकार भले ही कर रही हैं, लेकिन कुछ चीनी मिल मालिक अपनी जिद पर अड़े हैं। वर्तमान पेराई सत्र में भी चार मिलें गन्ना एक्ट की धज्जियां उड़ा रहीं हैं। गोला, पलिया, खंभारखेड़ा और ऐरा मिलें गन्ना एक्ट के मुताबिक किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं कर रही हैं, बल्कि हद यह है कि अभी तक एक पैसे का भुगतान नहीं किया है। जबकि पेराई सत्र शुरू किए हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है।
गोला मिल में तीन नवंबर 2018 से, पलिया और खंभारखेड़ा में 10 नवंबर 2018 से, ऐरा मिल में तीन दिसंबर 2018 से गन्ने की पेराई प्रारंभ हुई थी। इसके बाद से अभी तक चारों मिलों ने एक दिन का भी भुगतान नहीं किया है। इससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इन चार मिलों पर किसानों का तीन अरब 23 करोड़ 24 लाख रुपये (14 दिन पूर्व तक) रुपये गन्ना मूल्य बकाया हो चुका है। इनके बेखौफ मिल मालिकों पर सरकार की चेतावनियों का भी असर नहीं हुआ है। खास बात यह है बजाज ग्रुप की तीन मिलों गोला, पलिया और खंभारखेड़ा ने इस वर्ष भुगतान तो नहीं किया है, लेकिन पिछले वर्ष 2017-18 का भी तीन अरब 29 करोड़ आठ लाख 26 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि बजाज की तीनों मिलों को गन्ना सप्लाई करने वाले किसानों को किस कदर आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है, क्योंकि इस वर्ष इन्होंने एक भी पैसे का भुगतान नहीं किया है।
बजाज ग्रुप की तीन मिलों ने इस वर्ष अभी तक भुगतान नहीं किया है, लेकिन वह पिछले वर्ष के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। ऐरा मिल ने भी भुगतान नहीं किया है, जिसके लिए मिल प्रबंधन को नोटिस दी गई है।
- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी