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योगी जी, सात महीने बीत गए साबुन बना, न सर्फ

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योगी जी! सात माह गुजरे, साबुन बना, न सर्फ
फरवरी में इन्वेस्टर्स समिट की बैठक में उद्यमियों ने किए थे वादे
नकारा सिस्टम के कारण साकार नहीं हुआ उद्यमियों का सपना
बैंक पहुंची फाइलें लटक गईं
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। जिले में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की केन्द्र और प्रदेश सरकार की मंशा के प्रति सिस्टम गंभीर नजर नहीं आता। इन्वेस्टर्स समिट 2018 की फरवरी में हुई बैठक में पांच उद्यमियों ने जिले में इन्वेस्ट कर साबुन, सर्फ, बेकरी, प्लाईवुड और दवाई बनाने के के दावे किए थे, लेकिन सात महीने गुजर गए इस दिशा में अब तक कोई पहल ही नहीं हुई। वजह है, राजस्व और बैंक कर्मचारियों का टालू रवैय्या।
जिले में चीनी उत्पादन को छोड़कर कारोबार के लिहाज से देखें तो कुछ भी ऐसा नहीं है कि उसे अपने जिले का उत्पाद बता सकें। इन्वेस्टर्स समिट में जिन पांच उद्यमियों ने उद्योग लगाने की प्लानिंग की है, वह भी सिस्टम की लापरवाही के कारण थकते नजर आ रहे हैं। इसमें सबसे प्रमुख उद्योग आयुर्वेदिक मेडिसिन का था, लेकिन डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह के आश्वासन के बाद एक महीना गुजर गया, भूमि की एनओसी अब तक नहीं मिल सकी है। वहीं कारोबारी मोहम्मदी उस्मान खान ने साबुन और सर्फ बनाने के लिए पांच करोड़ के प्रोजेक्ट की योजना बनाई है, लेकिन अब उनकी फाइल बैंक में ही धूल फांक रही है। कमोवेश यही स्थिति बेकरी उद्योग लगाने जा रहे मोहम्मद एजाज और प्लाईवुड उद्यमी दीपक अग्रवाल की फाइल का भी है। वहीं एथेनॉल बनाने के लिए बिड़ला ग्रुप की ऐरा चीनी मिल का 133 करोड़ का प्रोजेक्ट है, जिसके पास अपनी भूमि है। मिल करीब 10 करोड़ रुपये इन्वेस्ट भी कर चुकी है। हालांकि अब किसी भी इन्वेस्टर का कार्य प्रगति पर नहीं है, जिसमें कहीं न कही सिस्टम की लापरवाही नजर आती है।
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एक जिला, एक उत्पाद योजना में भी फेल
प्रदेश सरकार ने हर जिले के उद्योग को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। इसके लिए एक जिला, एक उत्पाद योजना लागू है। इस योजना के अंतर्गत जिले के मशहूर उत्पादन को बढ़ावा देना है। जिले में थारू उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए डीएम के स्तर से योगी सरकार बनने के बाद प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें थारू जनजाति की अग्रणी महिला आरती राना के प्रयास से 134 लोगों ने आवेदन किए थे, लेकिन डेढ़ साल बीत गए पर किसी भी आवेदक को बैंक ने धन नहीं दिया। इससे इस योजना में भी जिला फेल नजर आ रहा है। ऐसी स्थिति में उद्योग को बढ़ावा कैसे मिलेगा? इस सवाल का जवाब जिला उद्योग केन्द्र के उपायुक्त शकील अहमद भी नहीं दे पा रहे हैं।

उम्मीद तोड़ चुके कारोबारी
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जब कोई सुनता ही नहीं तो कैसे लगाऊं इंडस्ट्री

आयुर्वेदिक मेडिसिन इंडस्ट्री का सपना संजोए जयप्रकाश मिश्र कहते हैं कि डीएम के आश्वासन के बाद भी भूमि की एनओसी नहीं मिल सकी है। ऐसे में उन्हें कोई उम्मीद नहीं है कि वह कब तक इंडस्ट्री चालू कर पाएंगे।
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बैंक में लटकी है फाइल

साबुन और सर्फ बनाने की फैक्ट्री लगाने जा रहे कारोबारी उस्मान खान कहते हैं कि वह बैंक से नियमित संपर्क में है, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है। फाइल लटकी है वरना अब तक इंडस्ट्री चालू हो गई होती।

नया हूं, फिर भी समाधान कराने मेें जुटा हूं
उद्योग विभाग के उपायुक्त शकील अहमद कहते हैं कि वह इसी महीने की शुरुआत में फर्रुखाबाद से तबादले पर आए। तब से उद्यमियों की समस्याओं का समाधान कराने में जुटे हैं। बैंक से स्वीकृत फाइलों पर धन दिलाकर जल्द ही सभी उद्योग चालू कराए जाएंगे।
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वर्जन.....
जिले में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हर महीने एक या दो मीटिंग उद्यमियों, अधिकारियों और बैंक अफसरों के साथ होती हैं। समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होता है। भूमि की एनओसी के मामले की प्रक्रिया लंबी है, जो चल रही है। नियमानुसार कार्रवाई जल्द पूर्ण होगी। जिले में उद्योग को बढ़ावा मिले। इसके लिए प्रयास जारी है। शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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