परिषदीय स्कूलों में शिक्षा को गुणवत्तापरक बनाने के लिए भारी भरकम बजट खर्च किया जा रहा है। सरकारें इन स्कूलों में कान्वेंट जैसी पढ़ाई देने का दावा कर रहीं हैं। कई स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने की योजनाएं भी फाइलों में हैं। यूनीफार्म, पुस्तकें, बैग, मिड डे मील आदि पर करोड़ों का बजट प्रतिवर्ष खर्च हो रहा है, इसके बाद भी यह विद्यालय मूलभूत सुविधाओं के लिए ग्राम पंचायतों के भरोसे हैं। शिक्षा विभाग के पास स्कूलों को सुविधा संपन्न बनाने के लिए बजट नहीं है। बरसात में क्षेत्र के कई स्कूूूलों में जलभराव इस कदर हो जाता है कि कई दिनों के लिए बच्चों की पढ़ाई बंद करनी पड़ती है।
बच्चों को गंदे पानी से होकर निकलना पड़ता है
मंगलवार की दोपहर गांव हफीजपुर के प्राथमिक स्कूल परिसर में अमर उजाला टीम को विद्यार्थी गंदे पानी से होकर निकलते दिखे। परिसर में कीचड़ और सुअर भी दिखाई दिये। प्रधानाध्यापक वंदना वर्मा ने बताया कि उनके यहां संगीता, शिखा, अल्का, अंजू देवी सहित पांच लोगों का स्टाफ है। बरसात होने पर विद्यालय में पानी भर जाता है। इससे बच्चों और शिक्षिकाओं का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई दिन के लिए स्कूल बंद भी करना पड़ता है। समस्या से ग्राम प्रधान को अवगत कराया गया, उन्होंने समस्याओं को देखते हुए बच्चों और शिक्षिकाओं को शौचालयों का निर्माण तो कराया है, किंतु जल निकासी की व्यवस्था न होने से विद्यालय में जल भराव की समस्या है।
पीने का पानी भी नहीं मिल पा रहा
हफीजपुर स्कूल परिसर में बरसात के कई दिन बाद भी अभी जलभराव है, जहां गंदे पानी, दुर्गंध के बीच प्रेशर हैंडपंप लगा है। जिस पर बच्चे और शिक्षक पानी पीने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। इस लिए उन्हें स्कूल से बाहर लगे नलों का सहारा लेना पड़ रहा है।
पानी निकासी का कोई इंतजाम नहीं
ममरी। कसबा बरगदिया, बगचन सहित परिषदीय स्कूूलों में पानी निकास की व्यवस्था न होने से जल भराव हो जाता है। कसबे के माध्यमिक विद्यालय में गेट से लेकर बरामदे तक बरसाती पानी भरने से बच्चों, शिक्षकों को स्कूल आने जाने में परेशानी उठानी पड़ती है। ग्राम प्रधान राजीव वर्मा, रामनरेश वर्मा, बिजेंद्र पटेल का कहना है कि बजट न मिलने से स्कूल मैदान की पटाई नहीं हो सकी है, जिससे जलभराव की स्थित बनी रहती है।
संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा
संसारपुर। बांकेगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत संसारपुर के प्राथमिक विद्यालय द्वितीय प्रांगण का तल रोड से नीचा होने के कारण बरसात में यहां जलभराव हो जाता है। इससेे विद्यार्थियों और शिक्षकों को गंदे पानी से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। बरसात के बाद धूप में कीचड़ और दुर्गंध से संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ रहा है। ग्राम प्रधान रामप्रसाद देवल ने बताया इस समस्या की जानकारी हुई है इस निचले प्रांगण में मिट्टी का पटाव करवा दिया जाएगा और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर स्कूल की चारदीवारी बनवाने का प्रयास करूंगा।