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रिकार्ड पेराई के साथ ही गन्ना मूल्य भुगतान कराना चुनौती

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रिकार्ड पेराई फिर भी नहीं मिला गन्ना भुगतान
बजाज की गोला, पलिया, खंभारखेड़ा समेत ऐरा मिल कर रही मनमानी
दिसंबर 2017 तक खरीदे गन्ना मूल्य का नहीं किया गया भुगतान

अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। पेराई सत्र 2017-18 में इस बार गन्ने का रिकार्ड उत्पादन हुआ है, जिससे किसानों की माली हालत में सुधार की संभावनाएं थीं। अब गन्ना मूल्य भुगतान के मामले पर किसानों की गाड़ी अटक गई है, क्योंकि बजाज ग्रुप की गोला, पलिया, खंभारखेड़ा मिल समेत गोविंद शुगर मिल ऐरा ने दिसंबर 2017 के बाद खरीदे गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। इससे इन चार मिलों पर ही किसानों का 15 अरब सात करोड़ 84 लाख रुपये बकाया हो चुका है, जबकि सभी नौ मिलों पर किसानों का 22 अरब चार करोड़ 24 लाख रुपये बकाया हो चुका है।
कुल नौ मिलों में से पलिया, ऐरा और संपूर्णानगर मिलें बंद हो चुकी हैं और खंभारखेड़ा मिल भी एक-दो दिन में बंद हो जाएगी। गन्ना विभाग के मुताबिक 14 मई तक किसानों ने मिलों को 1343.88 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति की है, जिसके एवज में किसानों को 42 अरब 95 करोड़ 87 लाख 81 हजार रुपये का भुगतान किया जाना है। इसके सापेक्ष अभी तक किसानों को 20 अरब 91 करोड़ 62 लाख 84 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। गोला मिल ने आठ जनवरी 2018 तक, पलिया ने नौ दिसंबर 2017 तक, खंभारखेड़ा ने 28 दिसंबर 2017 तक और ऐरा मिल ने 27 दिसंबर 2017 तक खरीदे गन्ना मूल्य का भुगतान किया है, जिससे इन चार मिलों पर ही सबसे ज्यादा किसानों का बकाया है। इसके अलावा अजवापुर मिल ने 21 मार्च 2018 तक, कुंभी और गुलरिया ने 20 मार्च 2018 तक, बेलरायां ने नौ फरवरी 2018 तक और संपूर्णानगर ने एक फरवरी 2018 तक खरीदे गन्ना मूल्य का भुगतान किया है।
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गन्ना विकास समितियों का भी करोड़ों बकाया
चीनी मिलों पर किसानों के अलावा गन्ना विकास सहकारी समितियों का भी कमीशन बकाया है। अभी तक कुल बकाए के सापेक्ष मिलों ने 13.58 प्रतिशत भुगतान किया है, जिससे मिलों पर समितियों का 59 करोड़ 23 लाख दो हजार रुपये बकाया हो चुका है।
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गन्ना मूल्य भुगतान कराने के लिए मिलों को नोटिसें जारी की गई हैं। जल्द भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। मंगलवार को गोला, पलिया और अजवापुर मिलों ने 6.65 करोड़ रुपये भुगतान किया है। बुधवार को डीएम ने सभी मिलों के अध्यासियों की बैठक बुलाई है, जिसमें शीघ्र भुगतान कराने के लिए रणनीति बनाई जाएगी।
- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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