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सीमा पर सड़क बनने में शहीद होंगे 50 हजार पेड़

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सीमा पर सड़क बनने से कटेंगे 50 हजार पेड़

दुधवा टाइगर रिजर्व के 21 हजार पेड़ भी काटने पड़ेंगे

सुरक्षा एजेंसियों की गश्त आसान करने के लिए बन रही सड़क
अशोक निगम
लखीमपुर खीरी। भारत-नेपाल सीमा पर सड़क निर्माण के दौरान उत्तर प्रदेश के जंगल के करीब 50 हजार पेड़ काटने पड़ेंगे। इसमें अकेले दुधवा टाइगर रिजर्व के 20 हजार 700 पेड़ काटने पड़ेंगे। पहले यह सड़क 24 मीटर चौड़ी बनाने का प्रस्ताव था जिसमें एक लाख से अधिक पेड़ सड़क की जद में आ रहे थे। इसे देखते हुए अब इस सड़क की चौड़ाई कम करके 15 मीटर कर दी गई है। इसके लिए जब दोबारा सर्वे हुआ तब भी 50 हजार से अधिक पेड़ इसकी चपेट में आ रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया है, जो विचाराधीन है।
सीमा सुरक्षा के मद्देनजर भारत नेपाल सीमा पर बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश होते हुए उत्तराखंड तक सड़क का निर्माण होना है, ताकि एसएसबी और सीमा पर तैनात दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के साथ वन विभाग को गश्त में आसानी हो सके। पहले इस सड़क को 24 मीटर चौड़ा बनाने का प्रस्ताव था जिसकी जद में उत्तर प्रदेश के एक लाख से अधिक पेड़ आ रहे थे। सड़क निर्माण से इतने बड़े पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए अब सड़क केवल 15 मीटर चौड़ा बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए दोबारा सर्वे किया गया तब भी 50 हजार पेड़ों के काटने की नौबत है।
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उत्तर प्रदेश में पीलीभीत से महराजगंज तक 575 किलोमीटर बनने वाली यह सड़क 227.7 किलोमीटर लंबाई में जंगल से होकर गुजरेगी। इसमें दुधवा टाइगर रिजर्व में 98.7 किलोमीटर की लंबाई शामिल है। जबकि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 17 किलोमीटर और सोहेलवा में 112 किलोमीटर लंबी सड़क गुजरेगी। इस बीच में पड़ने वाले वन क्षेत्र में साल सागौन के पेड़ों के अलावा सामान्य प्रजातियों के पेड़ व नये रोपे गए पौधे भी शामिल हैं। लखीमपुर खीरी में इस सड़क की कुल लंबाई 70.85 किलोमीटर है।

प्रदेश के वन क्षेत्र में सड़क बनाने में कटेंगे ये पेड़
वन क्षेत्र.......................लंबाई.......कटने वाले पेड़
पीलीभीत टाइगर रिजर्व....17 किमी.....1100 पेड़
दुधवा टाइगर रिजर्व.........47 किमी....11000 पेड़
डीटीआर बफर जोन........5.7 किमी.....1700 पेड़
कतर्नियाघाट..................46 किमी......8000 पेड़
सोहेलवा वन प्रभाग........112 किमी....27000 पेड़


भारतीय वन्यजीव संस्थान कर रहा सीमा पर सर्वे
सीमा पर सड़क निर्माण के दौरान वन और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीम प्रभावित होने वाले क्षेत्रों का दौरा कर रही है। यह टीम सड़क निर्माण से पर्यावरणीय और ईकोसिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन कर केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद ही केंद्र सरकार अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करेगी।

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सीमा की सुरक्षा के लिए भारत-नेपाल सीमा पर सड़क निर्माण किया जा रहा है। सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई कम होने के बाद दोबारा सर्वे किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश के करीब 50 हजार पेड़ काटने पड़ेगे।
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- डॉ. अनिल पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन

राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा पर सड़क निर्माण किया जाना है। इसकी जद में आने वाले पेड़ों को काटने के लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से एनओसी का आवेदन किया गया है। एनओसी मिलते ही सड़क निर्माण शुरू होगा।
- दयाराम, अधिशासी अभियंता, इंडो-नेपाल बार्डर खंड, लोकनिर्माण विभाग
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