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नए साल पर झादीताल में सैलानियों को हो सकते हैं बाघ के दीदार

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दुधवा पार्क में विचरण करता गैंडा। - फोटो : अमर उजाला
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पलियाकलां। नए साल में दुधवा नेशनल पार्क आने वाले सैलानियों को इस बार झादीताल में बाघ के दीदार हो सकते हैं। कारण यह है कि जंगल के बाहर जीव जंतुओं के निकलने के बाद बाघ भी उनके पीछे-पीछे यहां आ जाता है।
किशनपुर सेंक्चुरी में बना झादीताल सैलानियों को अपनी तरफ काफी आकर्षित करता है। यहां दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का बसेरा बना रहता है। यहां पर अक्सर ताल में पक्षियों की संख्या सैलानियों को अपनी तरफ ज्यादा ही आकर्षित करती हैं। वहीं बारहसिंघा और हिरन भी इस ताल के आसपास डेरा डाले रहते हैं। जंगल के बाहर जीव जंतुओं के निकलने के बाद बाघ भी उनके पीछे-पीछे यहां आ जाता है। जिससे सैलानियों को झादीताल में बाघ के दीदार आसानी से हो सकते हैं। नए साल का जश्न मनाने आने वाले सैलानियों के साथ ही बाघ के दीदार को तरसते सैलानियों की पहली पसंद किशनपुर रेंज का झादीताल हो सकता है।
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अमहा ताल के पास भी सैलानियों का लगा रहता है डेरा
दुधवा नेशनल पार्क के जंगल के अंदर से होकर सलूकापुर को रास्ता जाता है। सलूकापुर जाने वाले रास्ते में अमहा ताल पड़ता है। यहां पर मचान आदि की व्यवस्था भी है। अमहा ताल की मचान से जंगल का दुर्लभ नजारा मिलने के साथ ही पशु-पक्षी व अन्य जीव जंतुओं का दीदार भी हो जाता है। जिसके कारण यहां पर जिप्सी चालक व अपनी निजी गाड़ियों से आने वाले सैलानी रूककर वन्यजीवों का दीदार करते हैं। इसके अलावा पानी की तलाश में बाघ भी अक्सर इधर ही आते हैं, जिससे सैलानी आसानी से उनके दर्शन कर सकते हैं।

गैंडा परियोजना भी सैलानियों को करती है आकर्षित
दुधवा में विश्व की अनूठी गैंडा पुर्नवास परियोजना भी सैलानियों को आकर्षित करती है। दुधवा नेशनल पार्क की दक्षिण सोनारीपुर रेंज के 27 वर्ग किलोमीटर के जंगल को उर्जाबाड़ से घेरकर एक अप्रैल 1984 में गैंडा पुनर्वास परियोजना शुरू की गई थी। भारत सरकार ने असम के पावितारा वन्यजीव विहार से दो नर व तीन मादा गैंडा लाकर दुधवा में गैंडा पुनर्वास परियोजना शुरू कराई थी। विश्व की यह एकमात्र ऐसी परियोजना है, जिसमें 106 साल बाद गैंडों को उनके पूर्वजों की धरती पर पुनर्वासित कराया गया था। इस परियोजना को देखने और फैंसिंग में गैंडों का दीदार करने को सैलानी काफी उत्सुक रहते हैं। जिसके कारण यहां भीड़ लगी रहती है।

झादीताल में हाथियों का झुंड भी करता है मस्तियां
झादीताल में हाथियों का झुंड सैलानियों को दिख सकता है। यहां पर हाथियों का झुंड अक्सर मस्तियां करता हुआ दिखाई देता है। यहां हाथियों के झुंड का नजारा भी सैलानियों को आकर्षित कर सकता है। जिससे यहां सैलानियों का तादाद बढ़ सकती है।

आकर्षण का केंद्र होगा टाइगर हैवेन
दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वन्य जीव प्रेमी बिली अर्जुन सिंह का निवास टाइगर हैवेन है। पार्क के बीच में बना टाइगर हैवेन देखने सैलानी जाने का लालयित रहते हैं।

मुख्य वन संरक्षक परिवार संग पहुंचे दुधवा
नए साल का जश्न मनाने के लिए मुख्य वन संरक्षक वीसी तिवारी अपने परिवार के साथ दुधवा नेशनल पार्क पहुंच गए हैं। शनिवार को हालांकि उन्होंने दुधवा का भ्रमण तो नहीं किया, लेकिन रविवार को उनके भ्रमण करने की उम्मीद पार्क प्रशासन ने जताई है।
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दुधवा नेशनल पार्क में प्रवेश शुल्क
दुधवा नेशनल पार्क में प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति तीन दिन 100 रुपये, विदेशी 800 रुपये।
बच्चा 60 रुपए, विदेशी बच्चे 700 रुपये, अतिरिक्त दिन 40 रुपये, विदेशी 350 रुपये।
वन मार्ग शुल्क प्रति वाहन भारतीय व विदेशी तीन-तीन सौ रुपये।

किशनपुर वन्यजीव विहार प्रवेश शुल्क
प्रति व्यक्ति तीन दिन 50 रुपये, विदेशी 600 रुपये।
बच्चा 30 रुपए, विदेशी 350 रुपये ।
अतिरिक्त दिन 40 रुपये, विदेशी 350 रुपये।

सवारी शुल्क
हाथी सवारी दो घंटा प्रति व्यक्ति 150 रुपये, विदेशी 300 रुपये।
नेचर गाइड शुल्क दो सौ रुपये, जिप्सी शुल्क 12 सौ रुपये।

कैमरा और वीडीओ आदि की फीस
बड़ा कैमरा फीस मूवी एवं वीडीओ 5000 रुपये, विदेशी 10000 रुपये।
छोटा कैमरा फीस 500 रुपये भारतीय, विदेशी 1000 रुपये।
फीचर फिल्म प्रतिदिन 100000 रुपये, विदेशी 150000 रुपये
डाक्युमेंट्री फिल्म प्रतिदिन 6000 रुपये, विदेशी 12000 रुपये ।
उपरोक्त के लिए सुरक्षा फीस फीचर फिल्म 100000 रुपये, विदेशी 150000 रुपये।
डाक्युमेंट्री फिल्म 25000 रुपये, विदेशी 25000 रुपये।


दुधवा में सैलानी लगातार बढ़ रहे हैं। झादीताल के साथ ही अन्य जगहों पर भी तैयारियां पूरी हैं। नए साल को लेकर अभी तक केवल मुख्य वन संरक्षक दुधवा पहुंचे हैं। नए साल से लेकर आगामी दस दिनों तक वीआईपी के आने की केवल संभावनाएं हैं। अभी किसी भी वीआईपी के आने की जानकारी नहीं मिली है।
रामप्यारे, रेंजर (पर्यटन), दुधवा नेशनल पार्क द
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