फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बुखार से पांच बच्चों की मौत

विज्ञापन
fever - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी।
विज्ञापन

ठंड बढ़ने के बावजूद बुखार का कहर कम नहीं हो रहा है। उधर निमोनिया ने भी बच्चों पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार से लेकर शनिवार की दोपहर तक जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती बुखार से पीड़ित चार बच्चों की मौत हो गई। जबकि शनिवार को बुखार पीड़ित दो और निमोनिया पीड़ित चार बच्चे और भर्ती हुए। उधर खीरी टाउन में भी बुखार से पीड़ित एक साल की बच्ची ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
गुरुवार को बच्चा वार्ड में बुखार से पीड़ित भर्ती हुए सचिन(10) और छोटी(3) की शुक्रवार को मौत हो गई थी। जबकि शनिवार को बुखार से भर्ती हुई पिंकी (6) पुत्री सुंदर निवासी मोहम्मदी और मनीषा(2.5) पुत्री मुरलीधर निवासी खीरी की भी मौत हो गई। उधर शनिवार को ही सीतापुर जिले के बेलापसुरा निवासी पुरुषोत्तम ने पुत्री सीमा(7) और खमरिया निवासी अनुज ने पुत्री लक्ष्मी (7) को बुखार आने पर बच्चा वार्ड में भर्ती कराया है। वहीं फूलबेहड़ निवासी देववंश ने पुत्री विद्या(10), द्वारिकापुरी निवासी अमित पांडे ने पुत्र रुद्र(1), छाउछ निवासी कुमारदीप ने पुत्र आर्यन(3) और गंगोत्री नगर निवासी काशीराम ने पुत्री चाहत(3) को निमोनिया होने पर भर्ती कराया है।
विज्ञापन

खीरी टाउन। तेज बुखार से मोहल्ला हनिया टोला निवासी करण की पुत्री साक्षी(1) की मौत हो गई। पिता करण ने बताया कि तीन दिन पहले साक्षी को तेज बुखार आया, जिस पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार न होने के कारण डॉक्टर ने बच्ची को लखनऊ रेफर कर दिया। शुक्रवार की शाम पुत्री की इलाज के दौरान मौत हो गई।
विज्ञापन


बचाव
. बच्चों को ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहनाएं।
. बच्चों को अधिक से अधिक तरल पदार्थ दें।
. रूम हीटर आदि का सावधानीपूर्वक प्रयोग करें।
. कमरे में अगरबत्ती, मॉस्कीटो क्वाइल आदि ऐसी चीजें न जलाएं, जिससे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो।

पांच साल तक के बच्चों को न दे कफ सिरप
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके वर्मा का कहना है कि पांच साल तक के बच्चों को सर्दी जुकाम होने पर उन्हें कफ सिरप नहीं देना चाहिए। अक्सर मां बाप ऐसी स्थित में बच्चों को कफ सिरप पिला देते हैं। ऐसे में पांच साल तक के बच्चे कफ थूक नहीं पाते और उनका बलगम अंदर ही फंसा रहता है जो उनके लिए मुसीबत बन जाता है। मां बाप को चाहिए कि ऐसी स्थित में बच्चों को कफ सिरप देने के बजाय अदरक, शहद, तुलसी आदि प्राकृतिक तत्व दें और डॉक्टर से इलाज कराएं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें