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सिस्टम का खेल: 325 का गन्ना 190 पर बेचने को मजबूर

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लखीमपुर खीरी।
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गन्ना विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही और चीनी मिल प्रबंधन की मनमानी से गन्ना किसान परेशान हैं। किसानों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना तोल की पर्ची जारी नहीं की जा रही हैं। बलरामपुर ग्रुप की कुंभी और गुलरिया चीनी मिल, अजवापुर और ऐरा मिल के किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। डीएससीएल ग्रुप की अजवापुर मिल को चालू हुए करीब एक माह हो रहा है, लेकिन किसानों को केवल एक पर्ची ही मिल सकी है। तो कुछ किसानों को अभी तक एक भी पर्ची जारी नहीं की गई है। मजबूरन किसान गन्ना माफिया के हाथों अपनी उपज को औने पौने दामों पर बेच रहे हैं। जिले में बॉयरल मिलों के गेट पर लिखी गन्ना खरीद की सूची दर्शाती है कि किसानों को किस तरह अपने 325 रुपये मूल्य वाले गन्ने को 190 से लेकर 210 रुपये तक में अपनी उपज को बेचना पड़ रहा है।
मैगलगंज। अजवापुर मिल द्वारा लघु एवं सीमांत किसानों को पर्चियां जारी नहीं की जा रही हैं। सिर्फ बड़े किसानों और गन्ना माफियाओं को धड़ल्ले से पर्चियां जारी हो रही हैं, जिसमें सहकारी गन्ना विकास समिति मैगलगंज के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। वजह है कि मिल द्वारा जारी इंडेंट को सहकारी गन्ना विकास समिति प्रमाणित करती है। किसानों को अपने कैलेंडर की जानकारी भी नहीं मिल पा रही है, क्योंकि पहले तो कैलेंडर बांटें नहीं गए। वेबसाइट पर कैलेंडर की स्थिति प्रदर्शित नहीं हो रही है।
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बिजुआ। भीरा गन्ना समिति के अंतर्गत पलिया चीनी मिल और गुलरिया चीनी मिल के किसान आते हैं। इस सत्र में गन्ना आयुक्त का दावा है कि किसानों को उनके खेत में बोए गए गन्ने के रकबे के अनुसार पर्चियां दी जा रही हैं, लेकिन जरूरतमंद किसान को पर्चियां ना मिलने से वह अपना गन्ना आधे मूल्य पर बेचने को मजबूर हैं। दरअसल, चीनी मिल में गन्ने का शीघ्र प्रजाति का रेट 325 है, लेकिन यहां बिजुआ इलाके में लगी बेलों पर यही गन्ना किसान अपनी जरूरत को 200 में बेचने को मजबूर हैं। प्रति क्विंटल गन्ने पर 125 का घाटा झेलने वाले किसान ना तो अपनी बात गन्ना आयुक्त तक पहुंचा पा रहे हैं और न ही समितियों के चक्कर लगा सकते हैं।
पर्चियां ना मिलने से परेशान किसान जब समिति के दरवाजे पर जाते हैं तो वहां से इस बार के कैलेंडर में गन्ना आयुक्त के संशोधन ना होने के आदेश का हवाला देकर लौटा दिया जाता है, लेकिन सच्चाई उससे परे है क्योंकि अगर फालतू पर्चियां ना मिल रहीं होतीं तो अवैध रूप से चल रहे कांटे एवं कथित रूप से दलाल इन्हीं किसानों का गन्ना खरीद कर इन्हीं चीनी मिल को सप्लाई नहीं कर पाते।
रामनगर कला के किसान संजय शुक्ला के पास साढ़े आठ एकड़ जमीन है। बृज किशोर शुक्ला के पास साढ़े पांच एकड़ जमीन है। परिवार में कई और सट्टे हैं, लेकिन इन्हें एक भी पर्ची नहीं मिली है। यही बस्तौली गांव की बेवा अलका दीक्षित के साथ भी हुआ है। अलका दीक्षित के 10 एकड़ जमीन में 6 से 7 एकड़ में गन्ना बोया हुआ है। इसके बाद भी अलका को अभी एक भी पर्ची नहीं मिली।

गन्ना माफिया चला रहे खुद का गन्ना तौल सेंटर
गन्ना आयुक्त के आदेश को धता बताकर गन्ना माफिया अपना सिक्का चला रहे हैं। गन्ना माफियाओं ने अवैध तोल सेंटर लगा रखे हैं, जिन पर वह धड़ल्ले से 190 से 210 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना खरीद कर मिलों को सप्लाई कर रहे हैं। यह अवैध गन्ना सेंटर धौरहरा बाईपास की एक बंद पड़ी क्रसर के अंदर लगा है। तो वहीं बसंतापुर गांव में ऐरा मिल के गन्ना तोल सेंटर के ठीक सामने चल रहा है। इसके अलावा हौकना मटेरा, नैनापुर, पहड़ियापुर, अभयपुर, लखनपुरवा, सिसैया, ईसानगर आदि गांवों में अवैध कांटे लगा रखे हैं।


क्या कहते हैं किसान

अभी तक नहीं आई एक भी पर्ची
महुआढाब निवासी किसान हरपाल सिंह ने बताया कि उनका गन्ना अजबापुर मिल जाता है, लेकिन अभी तक शीघ्र प्रजाति की एक भी पर्ची नहीं आई है। इसके लिए कई बार सहकारी गन्ना समिति पर शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।


बड़े किसानों को मिल जाती हैं पर्चियां
हैरमखेड़ा निवासी किसान दयाराम ने बताया कि करीब 20 बीघा पेड़ी गन्ना फसल खेत में खड़ी है, जिसे बेचने के लिए अभी तक एक भी पर्ची नहीं मिली है। वहीं बड़े किसानों की रोज पर्चियां आ रही हैं।


प्रभावित होगी गेहूं बुवाई
किसान राजेंद्र कुमार ने बताया कि 10 बीघा पेड़ी गन्ना खड़ा है, लेकिन अभी तक तोल कराने के लिए मिल ने एक भी पर्ची जारी नहीं की है। इससे वह खेत खाली नहीं कर पा रहे हैं, जिससे गेहूं बुवाई भी प्रभावित होगी।


पर्चियां न मिलने से सूख रहा गन्ना
किसान बलवंत ने बताया कि आठ बीघा पेड़ी गन्ना खेत में खड़े खड़े सूखने लगा है। अभी तक पर्चियां नहीं मिली हैं। शिकायत भी नहीं सुनी जा रही है।


यहां तो 150 रुपये में बिक रहा गन्ना
रामनगर कला के किसान मनोज शुक्ला बताते हैं कि नदी पार रामपुर में कुछ लोग एक कांटा लगाकर गन्ना खरीद कर रहे हैं। किसान मजबूरी में अपना गन्ना उसी कांटे पर 150 रुपये में बेचने को मजबूर है। उन्होंने बताया कि यह लोग गन्ना चीनी मिल को सप्लाई करते हैं।
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पर्चियां न मिलने की शिकायतें मिली हैं, जिसके लिए संबंधित समितियों के सचिवों को निस्तारण कराने के निर्देश दिए गए हैं। मिल प्रबंधन द्वारा धांधली किए जाने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। धौरहरा क्षेत्र में अवैध सेंटर चलने की जानकारी नहीं है।
- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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