फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राव मंशाराम ने शुरू कराई थी श्री रामलीला

विज्ञापन
राव मंशाराम ने शुरू कराई थी श्री रामलीला - फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
विज्ञापन
गोला गोकर्णनाथ।
विज्ञापन

छोटी काशी का श्री रामलीला महोत्सव आबादी बसने के एक वर्ष बाद 1989 में राव मंशाराम ने शुरू कराया था। शिव-पार्वती द्वारा किसी न किसी रूप में रामलीला देखने की मान्यता के कारण दूर-दूर से दर्शक ऊंट गाड़ी, लहड़ू, बैलगाड़ी और तांगे पर बैठकर यहां आते थे। रामलीला प्रदर्शन की व्यवस्था पहले श्री रामलीला समिति की थी, जिसका गठन प्रतिवर्ष किया जाता था। वर्ष 1936 में श्री रामायण सभा ने सात साल तक इसका जिम्मा संभाला। 1943 में समिति ने फिर इसकी व्यवस्था संभाली। समिति का गठन प्रतिवर्ष श्री रामजानकी मंदिर में सर्व सम्मति से किया जाता है।

ब्राह्मण बालक करते थे अभिनय
अतीत में रामलीला मंचन में नगर के ब्राह्मण परिवार के बालक, किशोर व युवक अभिनय करते थे। शुरू से ही मेला मैदान में होने वाली श्री रामलीला में रात में धार्मिक नाटकों का मंचन होता था। वर्षों पूर्व से ब्राह्मण परिवारों के लीला प्रदर्शन की परंपरा समाप्त हो गई, जो अयोध्या की नाट्य पार्टियों ने ले ली थी। अब कई वर्षों से मथुरा की पार्टियां रामलीला का मंचन करती हैं। रात में धार्मिक नाटक के स्थान पर श्रीकृष्ण लीला होने लगी है। रामलीला का मंचन भी मैदान की जगहे अब मंच पर होने लगा है, लेकिन रावण वध अब भी मैदान में ही होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


93 वर्ष पहले मिला श्री रामलीला भवन
नगर के पूर्वी दीक्षिताना में श्री रामलीला मंदिर है। यह स्थान वर्ष 1924 में महोली जिला सीतापुर के गुजराती ब्राह्मण गोकर्ण प्रसाद और नरायनलाल ने भगवान स्वामी के नाम दान कर रजिस्ट्री कराई थी। देखरेख का जिम्मा उन्होंने श्रीरामलीला कमेटी को सौंपा था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें