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अप्रैल तक दुधवा के लिए सही नहीं रहा साल 2019

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पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क का नवीन पर्यटन सत्र नवंबर 2018 में शुरू हुआ था। जिसके बाद नया साल आया तब से लेकर अब तक दुधवा नेशनल पार्क ने कई प्रमुख वन्यजीवों को खोया है। अप्रैल तक दुधवा पार्क के लिए नया वर्ष 2019 सही नहीं रहा है।
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बता दें कि अलौकिक वातावरण और विभिन्न वन्यजीवों को अपने आगोश में समेटे विश्वविख्यात दुधवा नेशनल पार्क का नया साल काफी खराब रहा है। शुरूआती दिनों में पार्क को झटके पर झटके लगने शुरू हो गए थे। जो अप्रैल माह तक चलते रहे। सबसे पहले नौ जनवरी को पलिया-भीरा रोड पर रपटा पुल के पास एक वाहन की टक्कर से बारहसिंगा की मौत हो गई थी। इसके बाद 22 फरवरी को दुधवा टाइगर रिजर्व में संचालित गैंडा पुर्नवास परियोजना फेज वन में दो गैंडों के बीच हुए आपसी संघर्ष में एक नर गैंडे की मौत गई थी, जो लगभग 15 वर्ष का था। इसके बाद बीती सात अप्रैल को दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन के अंतर्गत सुमेरनगर गांव के पास एक नर तेंदुए का शव मिला था। इसकी उम्र भी करीब तीन से चार साल थी इसकी मौत भी आपसी संघर्ष में हुई थी। इसके बाद अब दुधवा रेंज की काला कुंडा वाटर होल के पास शव मिलने से पार्क प्रशासन काफी मायूस है। इन मौतों के बाद यह स्पष्ट हो रहा है कि दुधवा नेशनल पार्क का यह साल अप्रैल तक काफी खराब रहा है।

डॉग स्क्वाड क्यूनो को लगाया गया
पार्क प्रशासन ने आसपास के इलाके में साक्ष्य जुटाने के लिए अपने सबसे ट्रेंड डॉग स्क्वॉड क्यूनो को लगाया है। इससे पहले भी सुमेरनगर में मिले तेंदुए के शव के बाद क्यूनो ने कई अहम साक्ष्य जुटाए थे। जिससे पार्क प्रशासन को अन्य तेंदुए की लोकेशन भी मिल पाई थी। डीडी महावीर कौजलगि ने बताया कि डॉग स्क्वॉड क्यूनो साक्ष्य जुटाने में पार्क का सबसे मददगार पहलू है।
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अन्य बाघ की पुष्टि के लिए लगाए गए कैमरे
दुधवा रेंज में जिस जगह बाघ का शव बरामद हुआ है उसके आसपास जंगल में पार्क प्रशासन ने अन्य बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए कैमरे लगाए हैं। कैमरा ट्रैप से अन्य बाघ की लोकेशन ट्रेस की जाएगी। जिससे यह भी पता चल सकेगा कि आपसी संघर्ष अगर हुआ है तो कोई और बाघ तो जख्मी नहीं हुआ है।

दो बाघों के साथ एक तेंदुआ की हो चुकी मौत
बीते कुछ महीनों में वन्यजीवों की मौत की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। अभी हाल ही में मैलानी रेंज में फंदे में फंसकर जहां बाघ की मौत हो गई थी। वहीं पलिया के सुमेरनगर के पास एक तेंदुए ने आपसी संघर्ष में अपनी जान गवां दी थी। अब दुधवा में शव मिलने के बाद एक बार फिर से यह लगने लगा है कि शायद विलुप्त होती बाघ प्रजाति पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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