बारिश के मौसम में इलाके के तालाबों में मगरमच्छों की आमद बढ़ गई है। इससे मछली पालक बेहद परेशान हैं। मगरमच्छ तालाबों में पली मछलियों को अपना निवाला बना रहे हैं। इसके अलावा तालाबों के पास मवेशी चराने के लिए जाने वाले लोगों के लिए यह मगरमच्छ खतरा बन गए हैं।
बारिश होने से क्षेत्र के तालाब लबालब भर गए हैं। पानी के अभाव में जो मगरमच्छ इधर-उधर भटक रहे थे उन्होंने फिर इन तालाबों में अपना बसेरा बना लिया हैं। इलाके के कई तालाबों में मछली पालन के अलावा मछली पकड़ने का ठेके हैं। मगरमच्छ इन तालाबों में पली मछलियों को अपना निवाला बना रहे हैं। इससे मछली पालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
तालाबों के किनारे अक्सर लोग अपने मवेशी चराने जाते हैं। कई बार पशुओं को नहलाने के लिए लोग तालाबों में घुस जाते हैं। उनके लिए भी यह खतरनाक साबित हो गए हैं। कस्बे से सटे महरताला गांव के तालाब में पिछले 15 दिनों से एक बड़ा मगरमच्छ दिखाई दे रहा है। इसी तरह देबीपुर, चौधीपुर आदि के तालाबों में मगरमच्छ की मौजूदगी से लोग दहशत में हैं। लोगों ने उधर मवेशी चराने जाना छोड़ दिया है। यहां तक कि लोग मछलियों का शिकार करने से डर रहे हैं।
महरताला गांव के तालाब में मछली पालक चंदन ने बताया कि जब से इस तालाब में मगरमच्छ आया है तब से तालाब की बड़ी मछलियां गायब हो गईं हैं। जो बचीं हैं उन्हें भी मगरमच्छ चट कर रहा है। मगरमच्छ के डर से तालाब की रखवाली और शिकार करना मुश्किल हो गया है।
खीरी ब्रांच नहर के जरिए तालाबों में आते हैं मगरमच्छ
क्षेत्र के तालाबों में मगरमच्छ बड़ी नहर के जरिए आते हैं। महरताला, चौधीपुर, नीमगांव, पसियापुर, देबीपुर, कोठीपुर आदि गांवों के तालाबों में मगरमच्छ खीरी ब्रांच से सीतापुर ब्रांच नहर में पहुंच जाते हैं। मगरमच्छों ने अपने आने-जाने का रास्ता इन नहरों और कुलाबों को बना रखा है। बरसात शुरू होने पर और बरसात के बाद तालाबों में पानी कम हो जाने पर इनका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
तालाबों से निकलकर घरों तक पहुंच जाते हैं मगरमच्छ
बारिश के मौसम में तालाबों से निकलकर अक्सर मगरमच्छ गांव और घरों तक पहुंच जाते हैं। हाल ही में एक मगरमच्छ चौधीपुर गांव में पहुंच गया। ग्रामीणों ने हिम्मत कर मगरमच्छ को पकड़ लिया और रस्सियों से बांधकर नहर में छोड़ दिया।
तालाबों में मगरमच्छों की बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि जिले की जैव विविधता समृद्ध हो रही है। जहां के तालाबों में मगरमच्छ हैं वहां के ग्रामीणों को सतर्क रहना चाहिए। गांव की आबादी में मगरमच्छ आने पर इसकी सूचना वन विभाग को दें, ताकि मगरमच्छों से बचाव किया जा सके, और उसे सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास में पहुंचाया जा सके।
डॉ. अनिल कुमार पटेल, उप-निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन