बाघ ने सियार को बनाया निवाला, दहशत
बाघ की मौजूदगी की वनविभाग ने की पुष्टि
निगरानी के लिए लगाईं गईं टीमें
ममरी। सुंदरपुर गांव के पास डेढ़ महीने से दहशत का पर्याय बना बाघ बृहस्पतिवार को भी गन्ने के खेतों में ग्रामीणों को दिखाई पड़ा। सूचना पर एसडीओ वनकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और पगचिह्न देखे। उधर बाघ मानसिंह के गन्ने में सियार को अपना निवाला बनाता रहा। जिसकी पुष्टि वनकर्मियों ने भी की है।
सुंदरपुर के बीडीसी रामकुमार वर्मा, सरदार लाल सिंह, पूर्व प्रधान सप्पू वर्मा आदि ग्रामीणों ने बताया कि गुरुवार को फॉरेस्टर रामप्रसाद, वनरक्षक अनिल शर्मा के साथ लालसिंह के झाले पर पहुंचे एसडीओ रविशंकर शुक्ला ने खेत में बने बाघ के पगचिन्हों का निरीक्षण किया। गांववालों को सतर्क रहने की सलाह दी। उधर गन्ने के खेतों में घूम रहे बाघ ने सुंदरपुर के किसान मानसिंह के उसी गन्ने में एक वन्य जीव सियार पर हमला कर उसे अपना निवाला बना लिया, जहां बाघ ने 18 जून को सुंदरपुर के 35 वर्षीय किसान बालकराम को मार डाला था। वहां ताजा खून पड़ा देख गांववालों के होश उड़ गए। फॉरेस्टर रामप्रसाद अनिल शर्मा, रामनरेश वर्मा आदि वनकर्मियों ने बताया कि बाघ ने वन्य जीव सियार को निवाला बनाया है। वनकर्मियों ने स्वीकारा कि बाघ अभी तक गन्ने के खेतों और कठिना नदी की झाड़ियों में मौजूद है। एसडीओ के निर्देश पर वनकर्मियों की टीमें बाघ की निगरानी में लगा दी गयी हैं। गांववालों का कहना है कि बाघ की दहशत में पहले उनकी गन्ने की फसल बर्बाद हुई है और अब धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। इतना सब होने के बाद भी विभागीय अधिकारी और डब्लूटीआई टीम भी बाघ को पकड़वाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। बल्कि कोरे आश्वासन ही उनके पल्ले पड़ रहे हैं। यदि यही हालत रही तो उनकी खेती चौपट हो जाएगी और उनका परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएगा। क्योंकि बाघ ने सियार को अपना पांचवां शिकार बनाया है।