मलमास में मंदिरों में जयकारों और मस्जिदों में होगी इबादत
15 मई को है तीसरा बड़ा मंगल
16 से शुरू होगा मलमास
17 मई से होगी रमजान की शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। मलमास यानी पुरुषोत्तम मास इस बार 16 मई से शुरू होगा। इस बार यह मास विशेष होगा। मंगलवार को जहां बड़े मंगल का आयोजन होगा तो वहीं अन्य दिनों में भी पूजा पाठ के कार्यक्रम होंगे। तो दूसरी तरफ 17 मई से रमजान शुरू होने से मस्जिदों में अल्लाह की इबादत होगी। 13 जून तक चलने वाले मलमास में हर रोज अलसुबह से लेकर शाम तक गंगा जमुनी संस्कृति देखने को मिलेगी। 15 मई को जेठ का तीसरा बड़ा मंगल और वट सावित्री व्रत से भी रौनक रहेगी।
मंगलवार को है वट सावित्री व्रत
मंगलवार को वट सावित्री व्रत है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की मंगल कामना के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजन करते हुए उसे रक्षा सूत्र बांधती हैं। सुबह से ही निर्जल व्रत रखकर महिलाएं वट वृक्ष के धागे से 108 फेरे लेकर मौसमी फल खरबूजा, अमियां, चना दाल आदि का दान करके वट सावित्री व्रत की कथा सुनती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में इसे बरसाइत कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन से बरसात का जन्म होता है और बारिश होनी भी शुरू हो जाती है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि उदया में अमावस्या मिलने पर मंगलवार को ही वट सावित्री व्रत रखना श्रेष्ठ होगा।
जेठ माह का तीसरा बड़ा मंगल
मंगलवार को जेठ माह का तीसरा बड़ा मंगल है। पूरे दिन जिले भर के हनुमान मंदिरों में बजरंगबली का पूजन, सुंदरकांड का पाठ सहित अन्य धार्मिक आयोजन होंगे। हनुमान भक्तों द्वारा शर्बत वितरण और भंडारा आदि के आयोजन किए जाएंगे।
मलमास में शिवपूजा करें
देवकली तीर्थ के आचार्य पंडित राजेश शास्त्री ने बताया कि अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास 16 मई से शुरू होगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि पुरुषोत्तम मास तीन साल में एक बार आता है। यह मास धर्म और पुण्य कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस माह में पूजन पाठ का विशेष फल मिलता है। पुराणों में वर्णित है कि भगवान विष्णु ने इस मास को मानव के पुण्य के लिए बनाया है।
अल्लाह की इबादत का माह है रमजान
जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना इशहाक का कहना है कि 16 मई को यदि चांद दिख जाता है तो 17 मई से रमजान का पाक महीना भी शुरू होगा, जिसमें खुदा की इबादत होगी। एक माह तक अल सुबह से लेकर देर रात तक मस्जिद से लेकर लोगों के घरों तक में छाई रहेगी। जून माह के दूसरे पखवाड़े में ईद होगी। तब तक गंगा जमुनी संस्कृति की जुगलबंदी जारी रहेगी। इस पवित्र माह में रोजेदार सुबह सहरी कर दिन भर खुदा की इबादत करेंगे और शाम होने पर मिल जुल कर शहरी इफ्तारी करेंगे।