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मानव जन्म लेते है जबकि भगवान अवतार लेते हैं

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shri krishna - फोटो : अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी। राजापुर कोठी नंबर एक में चिन्मय मिशन के तत्वावधान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा व्यास ब्रह्मचारी कौशिक चैतन्य ने श्रीकृष्ण जन्म, बाल लीला, माखन चोरी और गोवर्धन पूजा की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मानव का जन्म होता है लेकिन भगवान अवतार लेते हैं। सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए योगेश्वर श्रीकृष्ण वासुुदेव, देवकी के पुत्र के रूप में अवतरित होते हैं।
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वासुदेव उन्हें अपने मित्र नंद के घर भेज देते हैं। नंद के घर पुत्र के जन्म का समाचार पाकर सभी प्रफुल्लित हैं। गोपियां नंद के घर बधाई देने जा रही है। चलो देखि आवे नंद घर लाला हुआ, यदुवंशी के घर उजाला हुआ। श्रीकृष्णावतार 16 कलाओं से युक्त है। कथा व्यास कहते हैं कि बालक श्रीकृष्ण पूतना का दूध पीने के साथ उसके प्राण भी पी लेते हैं। पूतना दुराशा की प्रतीक है। कृष्ण सकटासुर और तृणावर्त को भी यमलोक पहुंचाते हैं। सकटासुर और कोई नहीं विषयों के प्रति हमारी आशक्ति और तृणावर्त क्रोध का प्रतीक है। क्रोध का जीवन अत्यंत अल्प है लेकिन इस पर नियंत्रण अति आवश्यक है।
कथा व्यास ने कहा कि कुल पुरोहित गार्गाचार्य नामकरण के लिए बुलाए जाते हैं। आचार्य शरीर से बलशाली होने के कारण रोहिणी के पुत्र का नाम बलराम, तथा सांवले होने के कारण देवकी पुत्र का नाम श्रीकृष्ण रखते हैं। बालक श्रीकृष्ण अनेक मनोहारी लीलाएं करते हैं। वे गोपियों के घर पहुंचकर जाकर माखन चुराकर खा जाते हैं। यहां कथा व्यास का कहना है माखन मिश्री की चोरी के साथ भगवान भक्तों के पापों की भी चोरी कर लेते हैं।
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परीक्षित शुकदेव जी से प्रश्न करते हैं कि नंद यशोदा ने कौन सा ऐसा पुण्य किया था कि उन्हें भगवान पुत्र के रूप में प्राप्त हुआ। कथा व्यास बताते हैं कि नंद पूर्व जन्म में द्रोण नामक वसु थे और यशोदा उनकी पत्नी धरा। उन्होंने तप कर भक्ति का वरदान मांगा था। बालक कृष्ण के ऊखल के के यमलार्जुन नामक वृक्षों में अटकने से वृक्ष धराशायी हो जाते हैं और दो सुंदर युवक भगवान की स्तुति करने लगते हैं। ये दोनों पूर्व जन्म में कुबेर के पुत्र नल कुबेर और मणिग्रीव थे। इसी क्रम में कथा व्यास ने वकासुर, अधासुर, कालीदह और चीरहरण की कथा सुनाई। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को चूर करने के लिए गिरिराज पूजन की परंपरा प्रारंभ की। क्योंकि भगवान किसी का अहंकार नहीं रखते। कथा में बीएनडी सिंह, पीएनडी सिंह, आरके सिंह, आरपी चंद्र, राजकुमार त्रिवेदी, डॉ. वृजराज सिंह, शैलेंद्र सिंह, राकेश मिश्र, सुधांशु मिश्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी, राज किशोर दीक्षित आदि मौजूद रहे।
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