मझगईं (लखीमपुर खीरी)। दुधवा के जंगल से निकलकर आए हाथियों ने पुरैना तालाब के पास बन रही कच्ची शराब की लहन पीकर किसानों के खेतों में जमकर उत्पात मचाया। इसके साथ ही कई बीघा गन्ने और गेहूं की फसल को तहस-नहस कर दिया। हाथियों की चिंघाड़ सुनकर पहुंचे किसानों ने आग जलाकर शोर मचाते हुए किसी तरह हाथियों को वहां से भगाया। वनकर्मियों के मौके पर न पहुंचने और तालाब किनारे बनाई जा रही कच्ची शराब के कारोबार से नाराज किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया।
चौकी क्षेत्र के गांव भगवंतनगर निवासी सियाराम, सेवकराम, गोकरन, अरुण कुमार, बृजेश, श्रीकेशन, चांदी आदि लोगों के गांव के उत्तर पुरैना तालाब के पास खेत हैं। इसमें गन्ने व गेहूं की फसल बोई गई है जो लगभग तैयार होने को है। किसानों ने बताया कि रात करीब दस बजे तक वे लोग फसल की रखवाली करते रहे थे, उसके बाद घर आ गए थे। घर आते ही उन लोगों को हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज सुनाई दी। कई लोग लाठी डंडा लेकर खेतों की ओर दौड़े। वहां पहुंचने पर पता चला कि हाथी उपद्रव कर रहे हैं। उन्हें देखकर किसान सहम गए। फसल बर्बाद होती देख किसान खुद को नहीं रोक सके और जैसे तैसे हिम्मत जुटाकर आग जलाई और शोर मचाना शुरू किया। काफी देर की मशक्कत के बाद हाथी खेत से हटे लेकिन इस दौरान करीब 25 बीघा गन्ने व गेहूं की फसल को तहस नहस कर चुके थे।
किसानों ने बताया कि तालाब के किनारे दो जगह कच्ची शराब बनाई जाती है। हाथी कच्ची शराब की लहन पीकर मदमस्त हो जाते हैं। फिर खेतों की ओर पहुंचकर फसल को चौपट कर देते हैं। वन अधिकारियों के मौके पर न पहुंचने और तालाब के किनारे बन रही कच्ची शराब के कारोबार पर अंकुश न लगाए जाने से नाराज किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि हाथियों ने उनकी फसल बचाई जाए और शराब बनाने के अवैध धंधे पर भी अंकुश लगे। उधर दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि हाथियों के उत्पात की सूचना मिली है, मामले की जांच कराई जा रही है।