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अस्वीकृत प्रजातियों के गन्ने बुवाई कतई न करें किसान

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अस्वीकृत प्रजातियों के गन्ने बुवाई न करें किसान
गन्ना आयुक्त के आदेश के बाद चीनी मिलों ने भी बदला सुर
कम उपज और कम परता निकलने का दिया हवाला
गन्ने के साथ सहफसली खेती करने पर विशेष जोर
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। चीनी मिलों में गन्ने का चालू पेराई सत्र समापन की ओर है, जिसके साथ ही गन्ने की बुवाई भी की जा रही है। इस बार गन्ने की अस्वीकृत प्रजातियों को लेकर किसानों को सतर्क रहना होगा, क्योंकि गन्ना आयुक्त ने अस्वीकृत प्रजातियों के गन्ने की बुवाई नहीं होने देने के निर्देश दिए हैं। वहीं चीनी मिलों ने भी अपनी एडवाइजरी जारी करते हुए अगले पेराई सत्र से अस्वीकृत गन्ना न खरीदने का फैसला सुनाते हुए किसानों को पंफलेट बांटे हैं, जिसमें गन्ने की स्वीकृत प्रजातियों की बुवाई के साथ ही सहफसली खेती करने के लिए प्रेरित किया है।
बाजार में चीनी के घटते रेट से हलकान चीनी मिलों के साथ ही गन्ना विभाग अलर्ट पर है, क्योंकि किसानों को अरबों रुपये गन्ना मूल्य भुगतान चीनी मिलों पर बकाया हो चुका है। भुगतान की गति बहुत धीमी है। इससे निपटने के साथ मिलों की स्थिति उबारने को किसानों को भी खेती में बदलाव लाना आवश्यक हो गया है। गन्ना विभाग ने शीघ्र पकने वाली 13 प्रजातियों और मध्य देर से पकने वाली 15 गन्ना प्रजातियों को बुवाई के लिए स्वीकृत किया है। शीघ्र पकने वाली प्रजातियों में को-0238, 0118, कोएलके 94184, कोशा 8272, 13231, यूपी 05125 प्रमुख हैं, जबकि मध्य देर से पकने वाली प्रजातियों में कोशा 09232, 8289, 12232, 97261, 01434, 11453, यूपी 0097 प्रमुख प्रजातियां हैं। गन्ना आयुक्त द्वारा इन्हीं प्रजातियों की बुवाई करने की सलाह दी गई है, जो किसानों को उनकी सहकारी गन्ना विकास समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।
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अस्वीकृत प्रजाति का 20 रुपये रेट कम
अभी अस्वीकृत प्रजातियों में शुमार को 0233, कोशा 92423, 91269, कोएलके 8102, को 1148, बीओ 91 की बुवाई नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इन प्रजातियों में कीट-रोग अधिक लगता है और उपज कम होने के साथ ही इनकी खरीद दर भी स्वीकृत प्रजातियों से 20 रुपये प्रति क्विंटल कम है।
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बसंतकालीन बुवाई में अब तक प्रदेश में 3.16 लाख हेक्टेअर से अधिक ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई की जा चुकी है। 2.48 लाख हेक्टेअर से अधिक गन्ने के साथ सहफसली खेती की जा चुकी है। विभाग की गन्ना बीज पौधशालाओं में पर्याप्त मात्रा में गन्ना बीज उपलब्ध हैं।
-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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