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तेजी से बदलते मौसम में डायरिया के मरीज बढ़े

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लखीमपुर खीरी। मौसम में परिवर्तन होने के साथ गर्मी ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि जिला अस्पताल में डायरिया और बुखार पीड़ितों की संख्या बढ़ने लगी है। गुरुवार को जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड से लेकर मेडिकल पुरुष और महिला वार्ड में डायरिया पीड़ित बच्चों की भरमार रही। पिछले तीन दिनों से ओपीडी में ढाई से तीन सौ मरीज डायरिया और बुखार पीड़ित आ रहे हैं।
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गर्मी बढ़ने के साथ खान पान और सफाई पर ध्यान न देने के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों में बीमारियों का संक्रमण होने लगा है। ऐसे में जिला अस्पताल के मेडिकल महिला और पुरुष वार्ड से लेकर चिल्ड्रन वार्ड में डायरिया, बुखार और पेट दर्द के मरीज भर्ती होने लगे हैं। गुरुवार को मेडिकल पुरुष वार्ड में दस से अधिक बुजुर्ग और युवा भर्ती हुए, जबकि चिल्ड्रन वार्ड में डायरिया पीड़ित तीन वर्षीय सौरभ, दो वर्षीय जरीब, डेढ़ साल की पवित्रा और तीन माह का सोनू को उल्टी-दस्त आने पर भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रशासन की मानें तो होली के पहले तक सात-आठ सौ मरीजों की ओपीडी होती थी, लेकिन पिछले तीन दिनों से यह संख्या बढ़कर 12 से 13 सौ पहुंच गई है। इनमें ढाई से तीन मरीज डायरिया और बुखार से पीड़ित होते हैं। बच्चों में डायरिया की शिकायत अधिक मिल रही है। इसी तरह निजी अस्पतालों में भी डायरिया बौर बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गई है।

दो तरह का डायरिया
डायरिया दो तरह का होता है। एक्यूट और क्रॉनिक। एक्यूट डायरिया, जीवाणु, विषाणु या पैरासाइट के कारण होता है। यह सामान्यत: हफ्ते भर में ठीक हो जाता है, लेकिन जब यह बीमारी हफ्ते भर से ज्यादा रह जाए तो उसे क्रॉनिक कहा जाता है। क्रॉनिक डायरिया आंत की विभिन्न बीमारियों के कारण होता है। इससे पाचन तंत्र में गंभीर गड़बड़ियां हो जाती हैं।
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छूषित पानी और खाना बढ़ा रहा बीमारी
दूषित खाना और पानी डायरिया रोग बढ़ाने में सहायक है। इससे मरीज के पेट में दर्द, मरोड़ के साथ लूज मोशन होने लगते हैं। इससे डिहाइड्रेशन की समस्या होती है और प्यास तेज लगती है, लेकिन पानी पीने पर उल्टी शुरू हो जाती हैं।

बच्चों में ज्यादा डायरिया होने की वजह
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आईबी त्रिपाठी का कहना है कि अक्सर घरवाले बच्चों के हाथ धोने पर ज्यादा जोर नहीं देते हैं। गंदे हाथों से खाना खाने या मुंह में हाथ डालने की वजह से बच्चे डायरिया के शिकार हो जाते हैं, इसलिए बच्चों में हाथ धुलने की आदत डालें। एंटी बैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें। कम से कम दस से बीस सेकेंड तक हाथों को अच्छी तरह साबुन से धुलकर उन्हें सूखे तौलिए से पोछें और उसके बाद ही खाना आदि खाएं।
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ये है कारण
खाने पीने की चीजों में प्रदूषण, उनका बासी या खराब होना
स्तनपान के दौरान साफ सफाई न रखना
बाहर का खाना, फास्टफूड और पैक्ड फूड का प्रयोग
धूप से आकर पानी पीना
एसी कूलर वाले कमरे से सीधे धूप में निकलना
रोटा वायरस का संक्रमण

ऐसे करें बचाव
साफ पेयजल का प्रयोग करें
बच्चों को पानी उबालकर पिलाएं
बाहर का खाना, फास्ट फूड आदि खाने से बचें
साफ सफाई और हांथ धुलने का विशेष ध्यान रखें
शौंच के बाद अच्छी तरह से हांथ धुलें
पेट दर्द होने पर डॉक्टर से मिलें
लूज मोशन होने पर ओआरएस घोल या फिर नीबू पानी का प्रयोग करें
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