महेवागंज/सुंदरवल। थाना फूलबेहड़ क्षेत्र में बृहस्पतिवार की शाम ट्रैक्टर-ट्राली ने साइकिल में टक्कर मार दी। हादसे में साइकिल पर सवार गांव सिसौरा निवासी एक महिला और उसकी मासूम बेटी की मौके पर ही मौत हो गई। वह अपने पति के साथ पुत्री की दवा लेकर घर वापस लौट रही थी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
गांव सिसौरा निवासी सूरज कुमार ने बताया कि उसकी पुत्री तीन वर्षीय अर्चना की तबियत खराब चल रही थी। वह बृस्पतिवार को साइकिल से पत्नी 28 वर्षीय सजनी और पुत्री को लेकर गांव बसैगापुर दवा लेने गया था। शाम को वापस आते समय करीब साढ़े आठ बजे सलारपुर गुरुद्वारा के पास ट्रैक्टर-ट्राली ने साइकिल में टक्कर मार दी। हादसे में पत्नी और पुत्री की मौके पर ही मौत हो गई। वह भी हादसे में घायल हो गया। दुर्घटना के बाद चालक वाहन मौके पर छोड़कर भाग निकला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों शव का पोस्टमार्टम कराया है। हादसे ने मजदूरी पेशा वाले सूरज की मानो जिंदगी ही तबाह कर दी। सूरज के मामा झब्बू लाल ने बताया की सूरज मूल रूप से गोला के चौराठिया गांव का रहने वाला है पर बचपन से ही वह सिसौरा गांव अपने ननिहाल में रहता है। पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को शव जब गांव पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। गांव में मातमी सन्नाटा छा गया।
जगह जमीन न होने से झेली दुश्वारियां
गरीबी का आलम यह कि सूरज मामा की दी हुई थोड़ी जगह में ही कच्चा घर बना कर रहता है। जमीन जगह न होने से उसकी रिश्तेदारी और बिरादरी में शादी न हो सकी थी। इस पर मामा झब्बू लाल ने सात वर्ष पहले बिहार राज्य के एक गांव निवासी महिला सजनी से सूरज की शादी करवा दी थी। सजनी के आने से सूरज का परिवार हो गया। दो बेटियों पायल और अर्चना का जन्म हुआ। इससे घर मे खुशियां लौटी। सूरज बेटियों और छोटे भाई अरुण की जिम्मेवारी अच्छे से निभा रहा था। न जाने किसकी नजर लगी कि सड़क हादसे में पत्नी और बच्ची की मौत ने एक पल में सूरज से उसकी खुशियां छीन ली। उधर घर मे मौजूद चार साल की पुत्री पायल अपनी मां को इधर उधर खोजते देख लोगों की आंखे नम हो गई।