28एलकेएच 18, 19, 20, 21
शारदा की बाढ़ से दर्जनों गांव घिरे
घरों में कैद होकर रह गए फूलबेहड़ क्षेत्र के हजारों लोग
खगईपुरवा गांव में तीन दर्जन से अधिक बच्चे बीमार
तीन गांवों पर एक नाव के सहारे चल रहा बचाव कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
महेवागंज। शारदा का जलस्तर बढ़ने से फूलबेहड़ में बंधे के अंदर बसे खगईपुरवा, बड़ागांव, मेहंदी, बहालीपुरवा, बसहा, नरहर, बेड़हा, इच्छारामपुरवा, भुलभूलिया सहित दर्जनों गांव टापू बने गए हैं। चारों ओर कई फुट गहरा पानी भरा होने से लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। जरूरतमंद लोग जान जोखिम में डालकर नाव से बाहर आ जा रहे हैं। खेतों में खड़ी फसल बाढ़ में डूब गई है।
फूलबेहड़ के बाढ़ प्रभावित इलाके में हालात इस कदर खराब हैं कि बाढ़ पीड़ितों को न तो पीने का साफ पानी मिल पा रहा और न ही खाने के लिए कुछ है। अनाज पानी में भीगकर खराब हो गया है। पशुपालक अपने मवेशियों को सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर छोड़ आए हैं। परिवार की देखभाल के साथ उन्हें मवेशियों की देखभाल के लिए बाढ़ का पानी पार कर जाना पड़ता है। यहां तक कि शौच के लिए लोग खासकर महिलाओं को नाव पर बैठकर बंधे के बाहर जाना पड़ रहा है। बाढ़ के चलते खगईपुरवा गांव में एक महीने से प्राइमरी स्कूल नहीं खुला है। बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है। गांव में लोगों को शौच के लिए नाव से बंधे के बाहर जाना पड़ रहा है। महिलाओं को छत और ऊंचे स्थान पर खाना बनाना पड़ रहा है। गांव में करीब तीन दर्जन से भी ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित हैं। इलाज तक नसीब नहीं हो रहा है।
बड़ागाँव में भागीरथी, राजकुमार गिरी, पंकज, अशोक, मिथिलेश, श्यामनाथ, जगदीश समेत कई लोग बुखार से तप रहे है। खगईपुरवा गांव में भी विनोद, ममता, जगदीश, सहित दर्जनों लोग बीमार है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक भी बार गांव को जाना उचित नहीं समझा है। प्रशासन ने लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।
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तीन गांवो में सिर्फ एक नाव
र प्रशासन की बदइंतजामी का हाल यह है कि बाढ़ से घिरे बड़ागांव, बसहा और खगईपुरवा गांव में सिर्फ एक नाव है। जरूरतमंदों को आने जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। खगईपुरवा निवासी नाविक मनोज और उसके पिता जगदीश ने बताया कि नावों की समस्या है। एक नाव होने से लोगों मे बैठने की होड़ रहती है। ज्यादा सवारियां बैठने से नाव का संतुलन भी बिगडने लगता है। जिससे कभी भी हादसा हो सकता है।
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बाढ़ से कुछ इलाके घिरे हैं। टीमें लगा दी गई हैं। नावों की पर्याप्त व्यवस्था भी की गई है। पीड़ितों के लिए सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्हें परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
-डॉ. लाल कृष्ण नायब तहसीलदार सदर
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28एलकेएच 351
पोखरा, भदईपुरवा, नारीबेहड़ में घाघरा का कटान शुरू
धौरहरा। उफनाई शारदा ने ईसानगर क्षेत्र के कई गांवों में भूकटान शुरू कर दिया है। दिन पर दिन हालात बिगड़ रहे हैं लेकिन सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड ने अब तक कोई बचाव कार्य शुरू नहीं किए हैं। कई गांवों की सैकड़ों एकड भूमि फसल समेत नदी में समा चुकी है। शुक्रवार को विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने बाढ़ कटान क्षेत्रों का जायजा लिया। साथ ही बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए अधिशासी अभियंता को आवश्यक निर्देश दिए।
जीवनदायनी घाघरा और शारदा नदियां बरसात आते ही क्षेत्रीय लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन जाती हैं। प्रति वर्ष नदियां कई गांव उजाड़कर बाशिंदों को सड़क पर खानाबदोशों की जिंदगी जीने पर विवश कर देती हैं। घाघरा ने इस बरसात में भी अपनी बिनाश लीला पोखरा, सरैंया, भदईपुरवा, रुद्रपुर, नारीबेहड़, हुलासपुर आदि गांवों से शुरू कर दी है इन गांवों में अब तक सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि को काटकर बस्ती की तरफ बढ़ती चली आ रही है। एसडीएम आशीष मिश्रा ने बाढ खंड अभियंता को पत्र लिखकर बचाव कार्य के निर्देश दिये हैं।
कटान की सूचना पर विधायक बालाप्रसाद अवस्थी ने भी कटान क्षेत्र के गांवों में जाकर बाढ खंड अभियंता सहित एसडीएम और पुलिस को बाढ़ कटान रोकने के उपाय और पीड़ितों के बचाव और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा है। पीड़ितों को हर संभव मदद के साथ-साथ राहत सामग्री मुहैय्या कराने को कहा। इस मौके पर एसडीएम आशीष मिश्र, तहसीलदार, एसओ ईसानगर आलोकमणि त्रिपाठी, बाढखंड अभियंता वीके सिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख राजीव अवस्थी आदि मौजूद रहे।
फोटो संख्या 28एलकेएच403, 404
बाढ़ से इमलिया फार्म जाने वाला रास्ता बंद
शारदा नदी का जलस्तर तो घटा, लेकिन भूकटान तेज
अमर उजाला ब्यूरो
पलियाकलां। लगातार रुक रुककर हो रही बरसात के बाद शारदा नदी का जलस्तर बढ़ गया था, लेकिन शनिवार को जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि अभी भी नदी जल आयोग के खतरे के निशान से एक मीटर सात सेमी ऊपर है। जलस्तर से कटान का खतरा बढ़ गया है। जिससे ग्रामीण काफी परेशान हैं। इमलिया फार्म जाने वाला रास्ता तो पूरी तरह से बंद हो गया है। इसका कारण है कि इस रास्ते में भयंकर गड्ढे हैं। ग्रामीणों को भीरा होकर इमलिया फार्म जाना पड़ रहा है।
बता दें कि पहाड़ों के साथ ही इलाके में हो रही बरसात के बाद शुक्रवार को शारदा नदी का जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया था। लेकिन शनिवार को नदी का रुख नरम रहा और नदी का जलस्तर कम हो गया। जल आयोग के अनुसार शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर सात सेमी ऊपर है। नदी से बाढ़ का खतरा तो अभी कम हुआ है लेकिन कटान का खतरा काफी बढ़ गया है। जिससे ग्रामीणों की दिलों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। नदी ने कटान करते हुए मझौरा, मटैहिया, कचनारा, आजादनगर, बर्बादनगर, मेलाघाट आदि गांवों की जमीनों को अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया है। उधर भीरा इलाके के इमलिया फार्म जाने वाला रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है। इस रोड पर चार फुट तक पानी भर गया है जिससे आवागमन बाधित हो गया है। इमलिया फार्म जाने वाले ग्रामीण भीरा की तरफ लगभग पंद्रह किलोमीटर का चक्कर काटकर इमलिया फार्म तक पहुंच रहे हैं। जिससे उनको भी परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है। श्रीनगर गांव में लोग मवेशियों के लिए चारा नदी पार से नाव के सहारे ला रहे हैं।
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नयापुरवा में कटान तेज होने से हो रही परेशानी
मझगईं। नयापुरवा इलाके में बाढ़ के हालात थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहां पर नदी तेजी से कटान कर रही है और ग्रामीणों के आशियानों को अपने निशाने पर ले रही है। जिससे ग्रामीणों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। नदी के कटान का दायरा बढ़ गया है और घटते जलस्तर के बाद नदी और विकराल रूप से भूकटान कर रही है। जिससे ग्रामीण काफी परेशान हैं।
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फोटो संख्या 28एलकेएच405
संपूर्णानगर इलाके में भी उफनाई नदी
संपूर्णानगर। लगातार हो रही बारिश के बाद चारों तरफ जहां जलभराव हो गया है। वहीं खजुरिया कस्बा में हजारा मार्ग पर शारदा नदी का पानी आ गया है, जिससे राहगीरों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। खेतिहर इलाकों में भी पानी भर जाने से किसानों को दिक्कतें हो रही हैं। फसलें भी जलमग्न हो गई हैं।