राजापुर मंडी में एफसीआई ने टिन शेड में गेहूं का भंडारण कराया लेकिन बारिश से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए। लिहाजा पहली बारिश में ही गेहूं की कई बोरियां भीग गईं। चबूतरे पर बल्लियां डालकर गेहूं की बोरियों के चट्टे लगाए गए, जिन्हें पॉलिथीन से ढका नहीं गया। गेहूं भीगने के बाद अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
रबी की फसल के क्रय वर्ष 2018-19 में सरकारी एजेंसियों ने लक्ष्य दो लाख सात सौ मीट्रिक टन को पीछे छोड़ते हुए दो लाख दो हजार 72 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है, जो अब तक का रिकार्ड है। इससे एफसीआई के पास भंडारण की समस्या पैदा हुई, क्योंकि गोदाम फुल होने के बाद हजारों मीट्रिक टन गेहूं क्रय केन्द्रों पर पड़ा था। लिहाजा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एफसीआई ने मंडी राजापुर के अलावा पलिया और तिकुनिया मंडी के टिन शेड में गेहूं का भंडारण कराया है। चबूतरे पर बल्लियां डालकर गेहूं की बोरियों का चट्टा लगाया गया है, लेकिन बारिश से बचाने के लिए पॉलिथीन से ढका नहीं गया। इसके अलावा जानवरों से सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। गेहूं को न ढकने से बारिश में भीगकर इसके सड़ने का खतरा बढ़ गया है। मानसून आने के बावजूद अधिकारियों ने समय रहते ध्यान नहीं दिया, जिससे दो दिन हुई मूसलाधार बारिश में गेहूं की बोरियां भीग गईं। भीग चुकी बोरियों में गेहूं खराब होने लगा है, जिसे कुछ दिन बाद कोटे की दुकानों पर भेज दिया जाएगा।