बिना संसाधन कैसे हो दुधवा के जंगल की सुरक्षा
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के संरक्षित जंगलों की सुरक्षा के लिए संसाधनों का टोटा है। कई कोशिशों के बाद भी जंगल में न तो अवैध घुसपैठ रुक पा रही है और न ही वनसंपदा का दोहन। पिछले वर्षों में पकड़े गए वन्यजीव तस्करों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि दुधवा के दुर्लभ वन्यजीव भी शिकारियों और अंतरराष्ट्रीय वन्य जीव तस्करों के निशाने पर हैं। संरक्षित वन क्षेत्र में भी बाघ, तेंदुए और दूसरे दुर्लभ वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं। वन विभाग के पास जंगल की सुरक्षा के जो इंतजाम हैं वह काफी नहीं हैं। इसी के मद्देनजर हाईकोर्ट ने दुधवा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा के लिए बीएसएफ तैनात करने की जरूरत पर जोर दिया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में वन विभाग के स्टाफ के अलावा स्पेशल टाइगर प्रोटक्शन फोर्स भी तैनात है लेकिन विस्तृत क्षेत्रफल के लिहाज से यह फोर्स काफी कम है। जरूरत पड़ने दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन सीमा पर तैनात एसएसबी की भी मदद लेता है। इसके बावजूद वनअपराधी जंगल में घुसपैठ कर दुर्लभ वन्यजीवों का शिकार और चोरी छिपे पेड़ों का अवैध कटान करने में कामयाब हो जाते हैं। भारत-नेपाल की खुली सीमा के चलते वनअपराधियों के लिए यह काम आसान होता है।
हाल ही में पीलीभीत जिले में बाघ के चार दांतों के साथ पकड़े गए दो वन्यजीव तस्करों ने खुलासा किया कि उन्होंने यह दांत दुधवा टाइगर रिजर्व की भीरा रेंज से प्राप्त किए हैं। इससे पहले भी पकड़े गए कई शिकारियों ने दुधवा टाइगर रिजर्व एरिया से बाघ की शिकार की बात स्वीकारी है। करीब सात-आठ माह पहले दिल्ली में नेपाली वन्यजीव तस्कर मंगल लामा बाघ की हड्डियों और अंगों के साथ पकड़ा गया था। सीबीआई ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि मंगल लामा कुछ दिन पलिया में रहकर गया है। इससे पहले 31 दिसंबर 2017 को खटीमा में भारत-नेपाल सीमा से सटे जंगल से पुलिस, एसटीएफ एसओजी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने खीरी जिले के दो तस्करों को पकड़ा। उनके पास से वयस्क बाघ की खाल और 8.3 किलोग्राम बाघ की हड्डियां बरामद हुईं। इनमें एक तस्कर गोला कोतवाली क्षेत्र के कमलापुर गांव का राजू और दूसरा मैलानी थाना क्षेत्र के गांव ढाका का निवासी महावीर था।
इसी साल 24 जनवरी 2018 को पलिया-दुधवा रोड पर धीरज भसीन निवासी नीलगिरी, अलकनंदा, नई दिल्ली को पकड़ा गया। उसके पास से तेंदुए की दो खालें बरामद हुईं। पूछताछ में उसने बताया कि वह दिल्ली में रहकर गिरोह का संचालन करता है। उसकी निशानदेही पर वन विभाग की टीम ने दिल्ली पुलिस के साथ एक फार्म हाउस पर छापा मारा। जहां से टीम ने अल्मोड़ा के गोपाल सिंह नेगी को गिरफ्तार किया। यह तराई के जंगलों के अलावा बागेश्वर और अल्मोड़ा जिलों से वन्यजीवों का शिकार कर नेपाल के रास्ते चीन भेजते थे।
29 जनवरी 2018 को नेपाल के सुनी गांव निवासी सुमन धिताल को भालू की 70 ग्राम पित्त और जड़ी बूटियों के साथ गिरफ्तार किया। इससे एक सप्ताह पहले कैलाली जिले के सीसा पानी में गुलदार की तीन खालें और हड्डी एक घर से बरामद की गई थीं। नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण तस्करों को बाघ, तेंदुओं की खालें और वन्यजीव अंग नेपाल के रास्ते दूसरे देशों में भेजना आसान होता है।
बड़े वन्यजीव तस्कर स्थानीय लोगों से कराते हैं शिकार
अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर शिकार के लिए स्थानीय और घुमंतू लोगों की मदद लेते है। शिकार के बाद तस्कर खाल और दूसरे कीमती अंग निकाल कर नेपाल के रास्ते चीन और तिब्बत आदि देशों में पहुंचा देते हैं। जंगल में शिकार यह अन्य वन संपदा के दोहन के लिए जंगल में घुसपैठ करते हैं। जंगल के आसपास बसे गांवों के लोग जंगल में घुसपैठ करने में आगे है।
खीरी जिले में संगठित वनअपराधियों की सक्रियता से इनकार नहीं किया जा सकता है। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के वन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। दुधवा टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटक्शन फोर्स भी तैनात है। इसके अलाव सीमा पर तैनात एसएसबी की भी मदद ली जाती है। यदि और कोई फोर्स तैनात होता है तो दुधवा के जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा में मदद मिलेगी।
-रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व