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ऐसे तो फेल हो जाएगी एक जिला, एक उत्पाद योजना

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ऐसे तो फेल हो जाएगी एक जिला, एक उत्पाद योजना
इन्वेस्टर्स समिट में किया गया था शामिल, नौ महीने बाद भी स्थिति जस की तस
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। थारू उत्पाद जिले को पहचान दिलाते हैं। नेपाल बार्डर के जंगल किनारे रहने वाले थारू बिरादरी के लोग अपने हाथों दरी, कैप, बैग आदि वस्तुओं को जूट आदि से तैयार करते हैं। औद्योगिक विकास के लिए थारू उत्पाद को एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया, लेकिन नौ महीने बाद भी इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। सिस्टम की लापरवाही के कारण स्थिति जस की तस है। इसमें थारू बिरादरी के 35 लोगों ने ऋण लेने का आवेदन किया। उद्योग कार्यालय से तो इन सभी आवेदकों की फाइल स्वीकृत हो गईं, लेकिन बैंक से इन लोगों को रोज टरकाया जा रहा है। इससे योजना के फेल हो जाने की आशंका बनी हुई है।
सरकार ने जिले की पहचान रखने वाली वस्तुओं को प्रोत्साहन देने के लिए एक जिला, एक उत्पाद योजना लागू की है। जिले से थारू उत्पाद को इस योजना में शामिल किया गया है। इस योजना से मिलने वाली तमाम छूटों से लखीमपुर के थारू उत्पाद को विकास के पंख लगेंगे। योजना के तहत थारू उत्पाद को विकसित करने के लिए उद्यमियों को तमाम छूटों का लाभ मिलेगा। इसके अलावा नई औद्योगिक इकाइयां विकसित करने के उद्देश्य से जिले में नए थारू उत्पाद सेंटर भी विकसित कराए जाएंगे, जहां उद्यमियों को थारू उत्पाद दरी, कपड़े, कैप, पर्स, सैंडिल, जूते आदि बनाने के लिए जमीन भी मुहैय्या कराई जाएगी। इसी के तहत थारू उत्पाद बनाने वाले उद्यमियों को प्रेरित कर इन्वेस्टर्स समिट में ले जाया गया, जहां 35 लोगों ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। इन सभी लोगों की फाइलों को मंजूरी दे दी गई है, लेकिन भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक इन्हें टरका रहे हैं। दो महीने पूरे हो रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी भी आवेदक को ऋण नहीं मिल सका है, जिससे इस योजना को अमली जामा कैसे पहनाया जा सकेगा। यह एक बड़ा सवाल है।
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थारू उत्पाद पर फोकस, लेकिन सिस्टम पुराने ढर्रे पर
प्रदेश में औद्योगिक माहौल को सुधारने और उद्योगों को विकास का नया चेहरा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 जनवरी 2018 को एक जिला, एक उत्पाद योजना की घोषणा की थी। योजना में विभिन्न जिलों के प्रमुख उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने के लिए हर जिले से एक उद्योग का चयन हुआ है। लखीमपुर का थारू उत्पाद इसमें शामिल है, लेकिन सिस्टम अपने पुराने ढर्रे पर है। नतीजतन अभी तक यह योजना एक कदम आगे नहीं बढ़ पाई है।
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योजनाओं से उम्मीद पूरी नहीं होती : आरती राना
थारू जाति की अग्रणी महिला उद्यमी और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायी आरती राना कहती हैं कि सरकार की मंशा थारू उत्पाद को आगे बढ़ाने की सदैव रहती है, लेकिन जितनी उम्मीद वह करती हैं, उतनी पूरी नहीं होती। इस सरकार में अभी तक किसी योजना का उन्हें लाभ नहीं मिल रहा है। दफ्तर से लेकर बैंक तक में दिक्कतें आ रही हैं।
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इन लोगों ने किया है आवेदन
थारू जाति की आरती राना, छेद्दो देवी, प्रेमा, पूनम, इंदरा, सीमा, संतोषी, परमिला, जानकी, चंद्रकिरन आदि 35 महिलाओं ने इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया है। दस हजार से लेकर एक लाख रुपये तक के आवेदन की फाइल भारतीय स्टेट बैंक शाखा चंदनचौकी से आगे नहीं बढ़ पा रही। नतीजतन आवेदक चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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एक जिला, एक उत्पाद योजना में फाइलें मिली हैं, जिनका सर्वे कराया जा रहा है। सभी फाइल प्रक्रिया में हैं। औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद नियमानुसार लोन दिया जाएगा। जानबूझकर किसी फाइल को रोका नहीं गया है।
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-राजवीर यादव, शाखा प्रबंधक- एसबीआई-चंदनचौकी।
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औद्योगिक विकास सरकार की प्राथमिकता है, जिसके तहत जिले के थारू उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए विभाग भी कटिबद्ध है। इन्वेस्टर्स समिट से भी नए उद्यमी आगे आए हैं। सभी योजनाओं को अमली जामा पहनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। वह लगातार आवेदकों से भी संपर्क कर रहे हैं और उनकी दिक्कतों को समाधान कर रहे हैं।
-शकील अहमद, उपायुक्त, जिला उद्योग केन्द्र, लखीमपुर खीरी।
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