दक्षिण के हाथी अब सीखेंगे उत्तर की ‘भाषा’
- कर्र्नाटक से आए हाथियों को स्थानीय भाषा सिखाने की प्रक्रिया हुई शुरू
-हाथियों को प्रशिक्षित करने के लिए स्थानीय महावत कर्नाटक से आए महावत दल की ले रहे मदद
महबूब आलम
पलियाकलां।
दुधवा नेशनल पार्क में कर्नाटक से आए दस हाथियों को स्थानीय भाषा सिखाने की पाठशाला शुरू कर दी गई है। कर्नाटक से आए महावत दल की मदद से स्थानीय महावत हाथियों को स्थानीय भाषा सिखा रहे हैं। अभी यह हाथी कर्नाटक की भाषा ही समझते हैं। दुधवा के हाथी इन हाथियों को हिंदी का ज्ञान कराएंगे। इस दौरान कर्नाटक से आए महावत दुभाषिए की भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें जंगल की पेट्रोलिंग और सैलानियों को भ्रमण कराने का प्राथमिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व के रमपुरवा हाथी कैंप से चार, सिमोगा से चार और नागरहोल से दो हाथियों को यहां लाया गया है। इनमें नर हाथी भास्कर, अमृता, पार्वती, किरन, नर हाथी नकुल, मादा काविनी, डायना और उसकी साढ़े तीन साल की बेटी कावेरी, टेरेसा और उसकी ढाई साल की बेटी मेघना शामिल हैं। जिनको मैलानी रेंज के नवनिर्मित क्वारेनटाइन में उतारा गया। इन हाथियों को यहीं पर रखा गया है। इन हाथियों को प्रशिक्षित करने का काम शुरू कर दिया गया है। इन हाथियों को विरासत में कर्नाटक की भाषा का ज्ञान मिला है और यह हिंदी भाषा को नहीं समझते। इससे स्थानीय महावतों को परेशानियां उठानी पड़ेंगी। इसको लेकर कनार्टक के बाबू के नेतृत्व में पशु चिकित्सक डॉॅ. विनय सहित कुल 12 लोगों का स्टाफ यहां आया है जिनमें महावत भी शामिल हैं। पार्क प्रशासन ने इन महावतों के यहां रहते ही हाथियों की पाठशाला शुरू कर दी है। इस पाठशाला में कर्नाटक गए स्थानीय महावत इरशाद, रामेश्वर, हरी प्रसाद, शफीक, सुशील और सुरेश आदि इनको हिंदी का प्रारंभिक ज्ञान कराएंगें। हाथियों की क्लास सुबह से शुरू होकर पूरे दिन चलेगी। हिंदी ज्ञान के बाद इन्हें क्षेत्ररक्षण में माहिर करने के प्रयास भी महावत शुरू करेंगें। इसके साथ ही सैलानियों को भ्रमण कराने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
महावतों का प्रयास है कि यह सभी हाथी हर क्षेत्र में माहिर हो जाएं ताकि आवश्यकता पड़ने पर यह किसी भी काम को आसानी से कर सकें। फिलहाल हाथियों की पाठशाला शुरू हो गई है इसमें बेस्ट स्टूडेंट कौन बनता है यह बाद में पता चलेगा।
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हाथियों को लेने यह दल हुआ था रवाना
पूरी वार्ता के बाद हाथियों को लाए जाने के लिए यहां से 23 अप्रैल को संत प्रकाश त्रिपाठी, सचिन, पुष्कर सिंह, प्रदीप वर्मा, पशु चिकित्सक विशेषज्ञ डॉ. नासिर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के रोहित रवि आदि का दल कर्नाटक गया था।
स्वभाव के अनुरूप मिलेगा काम
कर्नाटक से आए हाथियों को लेकर पार्क प्रशासन ने खाका तैयार कर लिया है। पार्क के डीडी महावीर कौजलगि ने बताया कि मैलानी के वन निगम में हाथियों को चार महीने तक वॉच किया जाएगा। उनके स्वभाव के साथ ही गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और उसी हिसाब से उनको काम दिया जाएगा। इसको लेकर महावतों को भी दिशा निर्देश दे दिए गए हैं।
इंसेट.......
2008 में आसाम से आए थे पांच हाथी
वर्ष 2008 में होली के दिन आसाम के जलदा पारा सेंचुरी से पांच हाथी दुधवा नेशनल पार्क आए थे। इन हाथियों को भी हिंदी भाषा का ज्ञान सिखाने के लिए पाठशाला लगाई गई थी। यह हाथी भाषा के ज्ञान में पारंगत भी हो गए थे।