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Lakhimpur Kheri News: गांव से भी बदतर हालत में शहर की दहलीज बसे 11 गांव

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सीमा विवाद के चलते नही बन पाई सेठघाट रोड
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लखीमपुर खीरी। सुख सुविधाओं की आस लेकर जिले के अलग-अलग हिस्सों से आकर शहर के बाहरी हिस्सों में बसने वाले लोगों का सपना टूट रहा है। पिछले 30-40 वर्षों से शहर से सटे इलाकों में हजारों की संख्या में मकान बन गए हैं, लेकिन ये 11 गांव अभी तक शहरी सुविधाओं से वंचित हैं। कारण यह है कि खेतों में हुई प्लॉटिंग से उपजीं ये बस्तियां सीमा विस्तार न होने से अभी तक शहर में शामिल नहीं हो सकी हैं।
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यहां बसे लोगों को उम्मीद थी कि नगर पालिका के सीमा विस्तार में यह गांव शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाएंगे, लेकिन ऐसा हो न सका। अब हाल यह है कि यहां के लोग तमाम मुसीबतें झेलने को मजबूर हैं। शहर की सीमा पर बसे यह गांव न शहर के रहे न गांव के। यहां मूलभूत सुविधाओं तक की कमी है। यहां न अच्छी सड़कें हैं, न नालियां बनी हैं। पेयजल के लिए भी लोगों को जूझना पड़ता है। पथ प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण रात होने पर ये गांव अंधेरे में डूब जाते हैं। (संवाद)

कब-कब हुई सीमा विस्तार की कवायद
बताया जाता है कि करीब 47 साल पहले वर्ष 1976 में अंतिम बार लखीमपुर नगर पालिका का सीमा विस्तार हुआ था। तब इसमें बड़खेरवा गांव को नगर पालिका में शामिल किया गया था। इसके बाद 12 साल पहले नगर पालिका ने सीमा विस्तार की कवायद शुरू की थी लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी की उदासीनता से नगर पालिका का सीमा विस्तार नहीं हो सका। दो साल पहले भी नगर पालिका सीमा विस्तार का प्रस्ताव नगर पालिका से भेजा गया था, लेकिन यह फाइल शासन स्तर पर ठंडे बस्ते में चली गई। इस सीमा विस्तार के तहत शहर से सटे 11 नए गांव जोड़े जाने थे।
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इस तरह से होना था सीमा विस्तार
नगर पालिका के कर्मचारियों का कहना है कि सीमा विस्तार को लेकर कई अहम पहलुओं को ध्यान में रखा गया था। अभी तक खीरी रोड पर नगर पालिका का क्षेत्र महज नहर तक है। विस्तार के बाद यह दायरा बढ़कर आईटीआई के आगे इंडस्ट्रियल एरिया तक होना था। सीतापुर रोड पर एलआरपी तक ही पालिका की सीमा है, जबकि विस्तार जल निगम तक होना था। गोला रोड की बात करें तो यहां ब्लॉक तक का क्षेत्र नगर पालिका में आता है, लेकिन लालपुर के आगे तक सीमा विस्तार होना था। देवकली रोड पर डीएस कॉलेज के आगे बढ़कर भंसड़िया तक सीमा विस्तार होना था। निघासन रोड पर पलिया बस अड्डे से आगे बढ़कर उल्ल नदी तक नगर पालिका का विस्तार होना था।

नगर पालिका विस्तार में शामिल हो सकते हैं यह मोहल्ले
अभी तक नगर पालिका का दायरा करीब 10 वर्ग किलोमीटर है। सीमा विस्तार के बाद बढ़कर करीब 16 किलोमीटर हो सकता है। बताया जाता है कि विस्तार के लिए जिन गांवों को चुना गया था, उनमें उदयपुर, छाउछ, राजापुर, सैधरी, पिपरिया, भंसडिया, सुआगाड़ा, प्यारेपुर, सलेमपुर कोन, बांसखेड़ा, गढ़ी मिदनिया आदि शामिल हैं। इन गांवों और शहर के बीच खेतों में हुई प्लाटिंग में करीब 2000 नए मकान बन चुके हैं। इनमें करीब 10000 की आबादी रहते हुए शहरी सुख-सुविधाओं की आस देख रही है।

शहरी क्षेत्र में शामिल होने से मिलेंगी यह सुविधाएं
मोहल्ले में बेहतर साफ-सफाई
जलनिकासी के लिए नाले नालियों का निर्माण
अच्छी और पक्की सड़कों और गलियों का निर्माण
मोहल्लों में पथ प्रकाश का इंतजाम
स्वच्छ पेयजल आपूर्ति
24 घंटे बिजली आपूर्ति

दस साल में होना चाहिए सीमा विस्तार
लगातार बढ़ रही आबादी को देखते हुए हर दस साल पर सीमा विस्तार किए जाने का नियम है, लेकिन 40 साल बीत जाने के बाद भी नगर पालिका के अधिकारियों ने सीमा विस्तार के बारे में नहीं सोचा। बताया जाता है कि शासन स्तर से सीमा विस्तार के बारे में जानकारी मांगी गई, लेकिन बोर्ड में प्रस्ताव कराने, शासन को भेजने की जरूरत ही नहीं समझी। लिहाजा शहर की सीमाओं से सटे मोहल्लों में निवास करने वाले लोग खुद को शहरी नहीं कह पा रहे हैं।

पिछले 25 साल से सीमा विस्तार को लेकर किसी प्रकार की कोई कवायद नहीं हुई है। अब नगर पालिका का सीमा विस्तार जरूरी हो गया है। जल्द डीएम से वार्ता कर सीमा विस्तार का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
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- डॉ. इरा श्रीवास्तव, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद लखीमपुर

सीमा विवाद के चलते नही बन पाई सेठघाट रोड

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