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अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों के निशाने पर दुधवा के बाघ

Sun, 01 Jul 2018 01:01 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
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dudhwa - फोटो : amar ujala
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 दुधवा टाइगर रिजर्व के बाघ और तेंदुए अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों के निशाने पर हैं। इस बात की पुष्टि पिछले दिनों पकड़े गए वन्यजीव तस्करों से पूछताछ में हो चुकी है। पिछले महीने दिल्ली में नेपाली वन्यजीव तस्कर मंगल लामा बाघ की हड्डियों और अंगों के साथ पकड़ा गया। सीबीआई ने केस दर्ज कर जब जांच शुरू की तो पता चला कि मंगल लामा कुछ दिन पलिया में रहकर गया है। आशंका जताई जा रही है कि दुधवा नेशनल पार्क में बाघ का शिकार कर हड्डियां और दूसरे अंग दिल्ली ले जाए गए। अब सीबीआई तस्कर के खीरी जिले में संपर्कों को खंगाल रही है।
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27 मई 2018 को नेशनल हाइवे नं.1 लिबासपुर नई दिल्ली से नेपाल के वन्यजीव तस्कर मंगल लामा को पकड़ा गया। तलासी लेने पर उसके पास से बाघ की हड्डियां और दूसरे अंग मिले थे। सीबीआई ने 28 मई को केस दर्ज कर जांच शुरू की। पूछताछ में उसने बताया कि वह कुछ समय पहले पलिया आया था और कई दिन यहां रुका था। सीबीआई ने दुधवा के अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले की तफ्तीश में मदद करने को कहा है।
इससे पहले 31 दिसंबर 2017 को खटीमा में भारत-नेपाल सीमा से सटे जंगल से पुलिस, एसटीएफ एसओजी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने खीरी जिले के दो तस्करों को पकड़ा। उनके पास से वयस्क बाघ की खाल और 8.3 किलोग्राम बाघ की हडिड़यां बरामद हुईं। इनमें एक तस्कर गोला कोतवाली क्षेत्र के कमलापुर गांव का राजू और दूसरा मैलानी थाना क्षेत्र के गांव ढाका का निवासी महावीर था। इनके तार कुख्यात अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर तोताराम और बावरिया गैंग से जुड़े होने की संभावना जताई गई। पूछताछ में आरोपियों ने मैलानी रेंज जंगल से बाघ का शिकार करने की बात स्वीकार की।
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इसी साल 24 जनवरी 2018 को पलिया-दुधवा रोड पर धीरज भसीन निवासी नीलगिरी, अलकनंदा, नई दिल्ली को पकड़ा गया। उसके पास से तेंदुए की दो खालें बरामद हुईं। पूछताछ में उसने बताया कि वह दिल्ली में रहकर गिरोह का संचालन करता है। उसकी निशानदेही पर वन विभाग की टीम दिल्ली पहुंची और दिल्ली पुलिस के साथ एक फार्म हाउस पर छापा मारा। जहां से टीम ने गोपाल सिंह नेगी निवासी कचैल थाना धनिया, जिला अल्मोड़ा उत्तराखंड को गिरफ्तार किया। यह तराई के जंगलों के अलावा बागेश्वर और अल्मोड़ा से वन्यजीवों का शिकार कर नेपाल के रास्ते चीन भेजते थे।
29 जनवरी 2018 को नेपाल की क्षेत्रीय अनुसंधान पुलिस टीम ने नेपाल के कैलाली जिला के धनगढ़ी में छापा मारकर जुम्ला जिला के सुनी गांव निवासी सुमन धिताल को भालू की 70 ग्राम पित्त और जड़ी बूटियों के साथ गिरफ्तार किया। इससे एक सप्ताह पहले कैलाली जिले के सीसा पानी में गुलदार की तीन खालें और हड्डी एक घर से बरामद की गई थीं। पकड़े गए वन्यजीव तस्करों से पूछताछ से इस बात की पुष्टि हुई है कि खीरी जिला अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों का हब बनता जा रहा है। नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण तस्करों को बाघ, तेंदुओं की खालें और वन्यजीव अंग नेपाल के रास्ते दूसरे देशों में भेजना आसान होता है।

बड़े वन्यजीव तस्कर स्थानीय लोगों से कराते हैं शिकार
अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर शिकार के लिए स्थानीय और घुमंतू लोगों की मदद लेते है। संपूर्णानगर क्षेत्र का नरौसा गांव इस काम के लिए कुख्यात है। यह गांव बावरिया गैंग का अड्डा माना जाता है। शिकार के बाद तस्कर खाल और दूसरे कीमती अंग निकाल कर नेपाल के रास्ते चीन और तिब्बत आदि देशों में पहुंचा देते हैं। कॅरियर के रूप में प्राय: महिलाओं का इस्तेमाल होता है।

चीन और तिब्बत में है वन्यजीवों की बेहद मांग
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह बताते हैं कि बाघ, तेंदुओं की खाल और वन्यजीव अंगों की मांग सबसे ज्यादा चीन और तिब्बत में है। तिब्बत में बाघ और तेंदुए की खाल की कीमत लाखों में है। इन खालों से बनी पोशाक पहनना यहां के लोग अपनी शान समझते हैं। जबकि चीन में बाघ की हड्डियों से टाइगर वाइन बनाई जाती है। अन्य कई अंग दवा बनाने में इस्तेमाल करते हैं।
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