फोटो-30 एलकेएच 201,202,203,204,205,206 और 207
कहर बनकर आया तूफान
गम में तब्दील हो गईं रमजान की खुशियां
एक साथ हुई चार मौतों से रो उठा भुड़वारा
गोला गोकर्णनाथ। मंगलवार की रात आया तूफान भुड़वारा गांव में एक परिवार पर कहर बनकर टूटा। तूफान से गांव की जामा मस्जिद की 130 फुट ऊंची मीनार के गिरने से अजीजुल्ला का मकान ढह गया। इसमें दबकर गृहस्वामी समेत चार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे से गांव में रमजान की खुशियां गम में तब्दील हो गईं। बुधवार को जब मृतकों के शव गांव लाए गए तो लोग बरबस रो पड़े।
गांव निवासी 55 वर्षीय अजीजुल्ला कुर्रैशी का पत्नी साजिदा, छह पुत्र, चार पुत्रियों सहित भरा पूरा परिवार है। निर्धनता के बावजूद भी मजदूरी पेशा वाले अजीजुल्ला अपने परिवार के साथ खुश थे। पांचों पहर के नमाजी भी थे। मंगलवार की शाम आठ बजे के लगभग नमाज के बाद वह घर आए। तभी अचानक तूफान ने दस्तक दे दी और देखते ही देखते गांव का माहौल मातम में बदल गया। घर में उनकी 51 वर्षीय पत्नी साजिदा, 18 वर्षीय पुत्र जुबेर, 14 वर्षीय पुत्री नाजिया, अमीन नगर महमदपुर निवासी उनका 36 वर्षीय साला जनाब जो छह माह से उन्हीं के साथ रहकर ड्राइवरी करता था। जनाब का 10 वर्षीय पुत्र तालिब। रमजान में आई लहरपुर सीतापुर निवासी 35 वर्षीय विवाहिता पुत्री तबस्सुम, उसकी आठ वर्षीय पुत्री अन्मता, छह वर्षीय पुत्री इल्मा, चार वर्षीय पुत्र तय्यब और 18 वर्षीय भांजी खुशनुमा थी। तूफान में भयानक धमाके के साथ जामा मस्जिद की मीनार अजीजुल्ला के घर पर गिर गई, जिसके साथ ही 11 लोगों से भरा घर मलबे में तब्दील हो गया। घटना से गांव में कोहराम मच गया। बचाओ बचाओं की आवाज गूंजने लगी। गांव के लोग मदद के लिए दौड़ पड़े।
ग्राम प्रधान यासीन कुर्रैशी ने पुलिस को सूचना दी। रात में ही कई थानों की पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुट गई। तीन जेसीबी की मदद से घंटों मशक्कत के बाद टूटे मीनार को हटाया जा सका तब तक काफी देर हो चुकी थी। उसके नीचे दबकर अजीजुल्ला, उनके पुत्र जुबेर, पुत्री नाजिया और तालिब की मौत हो चुकी थी, जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। शवों और घायलों को रात में ही सीएससी भेजा गया डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया वहीं कोतवाली पुलिस ने शव सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।
--------------
30 एलकेएच 5, 6, 7
घायलों की हालत खतरे से बाहर
जिला अस्पताल में भर्ती 35 वर्षीय जनाब, आठ वर्षीय इलमा और आठ वर्षीय अनंता की हालत अब खतरे से बाहर है। जनाब अमीरनगर के महमदपुर निवासी हैं। वह अपने साले अजीजुल्ला के घर आए थे और हादसे का शिकार हो गए। वहीं इलमा और अनंता अजीजुल्ला की नातिन हैं।
कभी न खा पाएंगे अब्बा के साथ बैठकर ईद की सेवइयां
मृतक अजीउल्ला के छह पुत्र थे जिसमें बड़े लाला, अब्दुल कमर, मोहम्मद उमर, हुरशेद दिल्ली में, छोटे लाला मुंबई में मेहनत मजदूरी करते हैं। वही सबसे छोटा पुत्र जुबेर घर पर पिता के साथ रहता था जिसकी मौत हो गई है। पिता की मौत पर दहाड़े मार कर रोते बिलखते बेटों को देख हर किसी की आंखें नम हो गई जो अब कभी अब्बा के साथ बैठकर ईद की सेवइयां नहीं खा पाएंगे।
बेवा पुत्री और उसके बच्चों के सहारा थे अजीजुल्ला
मृतक की सबसे बड़ी पुत्री रहमतुन्निशा के पति मोहम्मदी निवासी आसिफ की सात वर्ष पूर्व मौत हो गई थी जिसके बाद से पिता ही बेटी और उसके तीन बच्चे आमिर, समीर और फलक के सहारा थे। जिनसे वह अपने सुख दुख बांटती थी। रहमतुन्निशा अपने बच्चों के साथ दिल्ली में मेहनत मजदूरी करती है। जिनका रो रो कर बुरा हाल है।
जनाजे में जुटी भारी भीड़
पोस्टमार्टम के बाद अजीजुल्ला कुर्रैशी, उनके पुत्र जुबेर, पुत्री नाजिया का बुधवार की दोपहर को भुड़वारा ईऔर जनाब के पुत्र तालिब का शव अमीरनगर महमदपुर ले जाया गया। गांव से निकले जनाजे में जन सैलाब उमड़ पड़ा। इसमें कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
डीएम-एसपी समेत अफसरों ने बंधाया ढाढस
रात में ही डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह, एसपी रामलाल वर्मा, एएसपी घनश्याम चौरसिया, एसडीएम पल्लवी मिश्रा, तहसीलदार आशुतोष गुप्ता, सीओ अभिषेक प्रताप, नायब तहसीलदार विकासधर दुबे, कोतवाल प्रमोद कुमार मिश्र सहित कई अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और परिजनों को ढाढस बंधाया।
मृतक आश्रितों को मिलेगा चार लाख का मुआवजा
तहसीलदार ने बताया कि दैवीय आपदा में प्रत्येक मृतक को चार लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। राजस्व की टीम पीड़ित परिवार से जानकारी कर दस्तावेज तैयार कर रही है। शीघ्र ही परिवार वालों को मुआवजा और हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी।
पीड़ित परिवार के पास न राशन कार्ड और न जॉब कार्ड
सरकार ने गरीबों के उत्थान के लिए भले ही कितनी ही जन कल्याणकारी योजनाएं चलाई हो, किंतु भुड़वारा में मृतक अजीजुल्ला के परिवार के लिए सभी सरकारी योजनाएं बेमानी साबित हुई है। प्रधान यासीन कुर्रैशी ने बताया कि पीड़ित परिवार के किसी भी सदस्य के पास न तो राशन कार्ड और न ही जॉब कार्ड हैं। कई बार फार्म भरवाए गए, लेकिन कार्ड नहीं बन पाए। पीड़ित परिवार भूमिहीन है।