कुशीनगर। दारोगा वायरलेस लिए लांचिंग पैड और ऑब्जर्वेशन प्वाइंट के बीच बांसी नदी के समीप पिपराघाट पुल के पास वायरलेस से कैनसेट रिकवरी टीम प्लीज, रिपोर्ट ऑन बांसी पुल प्वाइंट अ, ब, स..कॉल लगा रहे हैं। एसडीआरएफ की टीम की मदद के लिए दूसरे सिपाही की ओर से भी वायरलेस पर कॉल लगाया जा रहा है।
वहीं, कार लिए एक दारोगा और तीन सिपाहियों की अलग-अलग रिकवरी टीम पहुंचते हुए प्रतिभागी युवाओं को लेकर खेतों और नदी में पहुंचती है जहां से उन्हें कैन सेट को सुपुर्द किया जाता है। इस दौरान बांसी और नारायणी नदी के तट से निकली जल से खेतों में जलभराव, खेतों में बालियां लगी धान और बांसी नदी में चल रहे नाव इन युवाओं के मन को आनंद से परिपूर्ण कर रहे थे।
युवा लगातार वीडियो बना रहे हैं और कुछ तो वीडियो कॉल कल इसे दिखाते हैं। पुणे की एक युवती अपने मां से बातचीत करते हुए जब उसे कैन सेटेलाइट मिल गया तो मुस्कुराते हुए उसका कहना था कि मोम! वी सक्सीड इन आवर मिशन..वी लांच रॉकेट एंड गेट और सेटेलाइट सेफली...इसके बाद खेतों की सुंदरता और यहां की वातावरण का उल्लेख करते हुए कहती है कि मोम सी व्हाट एन अमेजिंग प्लेस? व्हाट ए ब्यूटी।
सिग्नल टूटने के बाद अंदाजे से कैन सेटेलाइट खोजते नजर आए प्रतिभागी
रॉकेट लांचिंग के बाद जब रॉकेट ऊपर जाता है और उसमें से सेटेलाइट बाहर आता है तो उसमें मौजूद डाटा युवाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए युवा कैन सेटेलाइट में तरह-तरह के इंफॉर्मेशन के लिए प्वाइंट बनाते हैं। इसके अलावा कुछ युवाओं द्वारा ऊपर से सेटेलाइट फोटो के लिए कैमरे भी लगाए जाते हैं। वहीं हर सेटेलाइट में जीपीएस लगाया जाता है ताकि युवाओं की कैन साइज सेटेलाइट पैराशूट के माध्यम से नीचे आए तो वह अक्षांश और देशांतर के माध्यम से लोकेशन ट्रेस कर लें। इस दौरान लांचिंग के बाद कैन सेटेलाइट ऑब्जर्वेशन प्वाइंट के बगल में बांसी नदी के किनारे, पिपरा घाट,नारायणी नदी के किनारे जाता रहा।इसमें कई बार तो युवाओं का संपर्क कैन सेटेलाइट क्रैश होने के कारण टूट भी गया जिससे वह अंदाजे से पुलिसकर्मियों और रिकवरी टीम की मदद से कैन सेटेलाइट को खोजते रहे।