तमकुहीरोड। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के क्षतिग्रस्त हिस्से का मरम्मत कराए बगैर उसमें पानी छोड़ दिए जाने से इसके टूटने का खतरा बढ़ गया है। नहर की पटरी क्षतिग्रस्त हो गई है। लोगों ने नहर की क्षतिग्रस्त पटरी की तत्काल मरम्मत कराए जाने की मांग की है।
जिले में पिछले साल नहरों की मरम्मत और सिल्ट निकाले जाने का कार्य कराया गया था। हालांकि, भगवानपुर से आगे बिहार बॉर्डर के बीच अहिरौली हनुमानसिंह, पकड़ीहार पूरबपट्टी, सिराजनगर, दवनहां, गौरी इब्राहिम, चखनी, मुन्नीपट्टी, गोसार्इंपट्टी, तवागड़यिता और लतवाचट्टी सहित कई स्थानों पर अब भी नहर क्षतिग्रस्त है। सिल्ट भी नहीं निकाली गई है। सिल्ट नहीं निकाले जाने से जहां नहर में पानी के प्रवाह की गति काफी धीमी है, वहीं इसके टूटने का भी खतरा बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत कराए बगैर पानी छोड़ा जाना ठीक नहीं है। ऐसे में यदि नहर टूटता है तो तमकुहीरोड और तमकुहीराज कस्बे के बीच जल भराव का गंभीर संकट पैदा हो सकता है और सैकड़ों हेक्टेयर धान की फसल को नुकसान पहुंच सकता है। क्षेत्र के डबलू राय, विरेन्द्र राय, गुड्डू गुप्ता, श्रीकिशुन पटेल, महेन्द्र प्रताप कुशवाहा, मक्खन जायसवाल आदि ने क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत कराए जाने की मांग की है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के अवर अभियंता राजेन्द्र प्रसाद का कहना है कि नहर जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने की समस्या से विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। साथ ही स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कोई समस्या न पैदा हो।