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बिना किसी तैयारी के चल रही है बोर्ड परीक्षा

Fri, 09 Feb 2018 12:51 AM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
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छात्र - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। प्रदेश में भाजपा की सरकार होने पर भले ही नकल विहीन परीक्षा का दावा किया जा रहा हो लेकिन माध्यमिक शिक्षा विभाग की तैयारियां देखकर तो ऐसा कत्तई नहीं लगता। आश्चर्यजनक यह है कि इतनी बड़ी परीक्षा करा रहे माध्यमिक शिक्षा विभाग को कक्ष निरीक्षकों की आवश्यकता और उपलब्धता के बारे में ही कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। बेसिक शिक्षा विभाग से जो कक्ष निरीक्षक ड्यूटी पर बुलाए गए हैं वे किस विषय के अध्यापक हैं इसकी जानकारी भी विभाग को नहीं है। पूरी परीक्षा केवल इस उम्मीद में चल रही है कि केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक और अन्य अफसर ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करेंगे।
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जिले में 293 कॉलेज हैं। इस वर्ष बोर्ड परीक्षा के लिए जिले में हाईस्कूल में 35875 बालक, 31339 बालिका संस्थागत व 4707 व्यक्गित परीक्षार्थी हैं। इंटर में 22532 बालक व 23425 बालिकाएं संस्थागत तथा 2386 प्राइवेट परीक्षार्थी हैं। हाईस्कूल के कुल 71921 तथा इंटर के 48343 परीक्षार्थियों के लिए 150 कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। मंगलवार से इन केंद्रों पर परीक्षाएं चल रही हैं। इस वर्ष शासन ने नकल रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरा भी लगवाया है। परंतु जिले स्तर पर परीक्षा की निगरानी कर रहे माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इतनी गंभीर परीक्षा के लिए बेहद हल्के ढंग से तैयारी की है। विभाग की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परीक्षा के दौरान कुल कितने कक्ष निरीक्षकों की जरूरत पड़ेगी, इसका ही आकलन नहीं किया गया है। सेंटर पर कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी के लिए कितने अध्यापक मौजूद हैं तथा कितने बाहरी शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी, इसका अनुमान केंद्र व्यवस्थापक के जिम्मे है। ये कक्ष निरीक्षक कहां से तथा कौन होंगे इसके लिए भी कोई तैयारी नहीं है।

यूपी बोर्ड की इस परीक्षा के लिए हाईस्कूल में 31339 और इंटर में 23425 बालिकाएं परीक्षार्थी हैं। इनकी परीक्षा अपने ही विद्यालय पर चल रही है। कुल 54764 बालिका परीक्षार्थियों के लिए महिला कक्ष निरीक्षकों की व्यवस्था नहीं है। सभी सेंटरों पर बालिकाएं परीक्षार्थी हैं लेकिन उस अनुपात में महिला कक्ष निरीक्षक ही नहीं हैं। कई स्कूलों में बेसिक शिक्षा परिषद के महिला अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई है। परंतु इनकी संख्या भी पर्याप्त नहीं होने की वजह से बालिकाओं की सघन तलाशी तक नहीं हो रही है। बालिकाओं के लिए स्वकेंद्रीय व्यवस्था होने व जांच की सुविधा नहीं होने के चलते परीक्षा की शुचिता स्वत: ही संदेह के घेरे में है।
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