पडरौना से चलने वाली रोडवेज की बस, ड्राइवर के ब्रेक लेते ही खिड़की खुल जाती है। इससे यात्रियों को ठ?
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कड़ाके की ठंड में रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अधितकर बसों की खिड़कियाें में रबर नहीं है। ब्रके लगने पर शीशे अपने आप खुल जाते हैं। वहीं, कुछ बसों में चालक के समीप लगा शीशा टूट गया है। लोगों के चढ़ने के लिए लगे हैंडल टूट गए हैं।
जबकि इन कमियों को दूर करने के लिए सरकार की ओर से ‘परिवर्तन की ओर’ नाम से अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में निगम के अधिकारियों को बसों को गोद लेकर देखरेख करने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन स्थिति जस की तस है।
जनपद में 36 बसें संचालित होती हैं। इसमें से परिवहन निगम की 21 व अनुबंधित 15 बसें हैं। प्रतिदिन चार हजार से अधिक यात्री आवागमन करते हैं, लेकिन बसों में ठंड से बचने के इंतजाम नहीं हैं। खिड़कियों में रबर नहीं होने से शीशे अपने आप खुल जाते हैं, तो कुछ शीशे जाम हो गए हैं। अधिकतर खिड़कियों में क्लिप नहीं हैं। इन्हें बंद करने में परेशानी होती है।
बसों को गोद लेने के बाद भी स्थिति जस की तस
पडरौना। रोडवेज की बदहाल बसों को दुरुस्त बनाने के लिए एक जनवरी 2023 से विभाग की ओर से ‘परिवर्तन की ओर’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत कुशीनगर के एआरएम बिंदू प्रसाद ने दस बसों को गोद लिया है। क्षेत्रीय प्रबंधक व सेवा प्रबंधक अपने क्षेत्र के सभी डिपो की दो-दो व सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अपने डिपो के निगम की दस बसों को गोद लेंगे। हालांकि इस अभियान का जिले में असर नहीं है। बसों में अभी अव्यवस्था है।
खिड़कियों में लगे शीशा खराब हो जाते हैं तो उसे बनवा दिया जाता है। बस में जो भी कमी रहती है, उसे ठीक कराया जाता है। दस बसों को गोद लेकर उनकी देखरेख की जा रही है।
- बिंदू प्रसाद, एआरएम, पडरौना डिपो