छितौनी/कुशीनगर। गंडक नदी के मुक्तिधाम पर शनिवार को एक विधवा ने अपने ससुर की चिता को मुखाग्नि दी। परिवार में कोई दूसरा पुरूष सदस्य नहीं होने के चलते बाकी कर्मकांड भी विधवा को ही पूरा करनी है।
खड्डा थाना क्षेत्र के गांव नरयनापुर निवासी दूधनाथ (70) के इकलौते पुत्र प्रभुनाथ की सात साल पहले मौत हो गई थी। प्रभुनाथ की विधवा पत्नी ज्योति ही परिवार का भरण-पोषण करती है। प्रभुनाथ व ज्योति से भी एक लडक़ी ही है। दूधनाथ भी लंबे समय से बीमार थे। शनिवार की सुबह उनका निधन हो गया। इसके बाद शव के अंतिम संस्कार को लेकर समस्या खड़ी हो गई। इस परिवार में कोई पुरूष सदस्य नहीं था। ससुर के शव के पास विलख रही विधवा बहू ने बेटे का भी फर्ज निभाते हुए ससुर की चिता को मुखाग्नि देने का निर्णय ली। विचार-विमर्श के बाद अन्य लोगों ने भी इस पर सहमति जताई।