पडरौना। बड़ी गंडक नदी के डिस्चार्ज में लगातार कमी होने के बाद नदी अब सामान्य स्थिति में लौटने लगी है। इससे खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में तटबंधों पर कटान का खतरा बढ़ गया है। स्वभाव के अनुसार नदी घटते जलस्तर में ही आक्रामक रुख अख्तियार करती है। इसको लेकर बाढ़ खंड के जिम्मेदार अलर्ट हो गए हैं। वहीं, एक दर्जन गांवों में घुसा बाढ़ का पानी कम होने लगा है, लेकिन लोगों की दुश्वारियां अब भी कम नहीं हुई हैं। लोग मचान और ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हैं। पशुओं के सामने चारे का संकट गहरा गया है। कम्युनिटी किचन से बाढ़ पीड़ितों को भोजन मुहैया कराया जा रहा है।
तीन दिन पहले शनिवार की रात वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 4.40 लाख क्यूसेक पानी नदी में डिस्चार्ज किया गया था। इससे नदी उफना गई और खड्डा व तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। खड्डा के रेताक्षेत्र नारायणपुर, शिवपुर, मरिचहवा, बसंतपुर आदि गांवों में पानी घुसने से लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे। तीन दिनों के बाद सोमवार को बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है।
नदी का डिस्चार्ज 2 लाख 70 हजार 400 क्यूसेक पर आ गया है।। इससे नदी सामान्य स्थिति में लौटने लगी है। खड्डा के भैंसहा गेज पर नदी खतरा बिंदु से 30 सेमी नीचे बह रही है। अभी जलस्तर में और कमी होने की संभावना है। जलस्तर में कमी होने के बाद रेता के गांवों से पानी नीचे उतरने लगा है। जबकि मरिचहवा में अब भी पानी भरा हुआ है। लोग नाव से जरूरी सामान की खरीदारी करने निकल रहे हैं।
तहसील प्रशासन की ओर से कम्युनिटी किचन चलाकर लोगों को भोजन मुहैया कराया जा रहा है। मरिचहवा-बसंतपुर मुख्य मार्ग पर जलभराव होने से आवागमन में तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं के चारे को लेकर भी पशुपालक परेशान हैं। वहीं, अब लोगों का कहना है कि नदी सामान्य स्थिति में लौट तो रही है, लेकिन जैसे ही डाउन स्ट्रीम में नदी आएगी तो सबसे पहले संवेदनशील बिंदुओं को निशाने पर लेकर कटान शुरु देगी। फिलहाल महदेवा और जवही दयाल के मुसहर टोले के सामने कटान थमा हुआ है। तटबंधों पर कटान रोकने को लेकर बाढ़ खंड के जिम्मेदार अलर्ट मोड पर हैं।